Honey trap:3,500 करोड़ का खेल, 300 लड़कियां, कैसे पाकिस्तान ने भारत में बिछाया जाल ?
नई दिल्ली, 6 जून: पाकिस्तान ने भारत से खुफिया जानकारी जुटाने के लिए हजारों करोड़ रुपये का जाल बिछाया है। इसके लिए पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई ने सैकड़ों जवान लड़कियों की भर्ती की है, जिन्हें बड़े-बड़े अफसरों को फंसाने के लिए तरह-तरह की ट्रेनिंग दी गई है। उन्हें उनकी कला में इस तरह से ट्रेंड किया गया है कि जो भी खुफिया सूचना की उन्हें दरकार है, वह हर हाल में उन्हें उपलब्ध करवाकर सकें। जोखिम बहुत बड़ा है, काफी हद तक पाकिस्तान को उसके इरादे में कामयाबी भी मिल रही है। लेकिन, भारतीय एजेंसियों के चौकन्ना रहने की वजह से वह जितना कुछ कर सकता था, वह नहीं कर पा रहा है। लेकिन, खतरा हर पल बढ़ रहा है।
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किसी भी हद तक जा सकती हैं हनी ट्रैप में शामिल लड़कियां
भारत में पिछले कुछ महीनों में हनी ट्रैप के मामलों में अचानक इजाफा हो गया है। जासूसी के लिए 'विष कन्याओं' का इस्तेमाल प्राचीन काल से होता रहा है। संवेदनशील जानकारी निकालने के लिए खूबसूरत लड़कियों के जरिए टारगेट को हिट करने का फॉर्मूला जितना पुराना है, उतना ही अक्सर अचूक भी होता है। सामान्य तौर पर हनी ट्रैप के जरिए फंसाने का एक ही मकसद है, दुश्मन देश से बेहद ही गोपनीय जानकारी हासिल करना। यह जानकारी सरकारी अफसरों, सेना के अधिकारियों या जो भी इसे देख रहे होते हैं, उन्हीं के पास होती है। इसलिए, जासूस हनी ट्रैप में उन्हें ही फंसाने की साजिशें रचते हैं। जासूसी के लिए इस्तेमाल होने वाली लड़कियां तरह-तरह के हथकंडे अपनाती हैं। यह शारीरिक संबंध कायम करने तक भी जा सकता है।

क्या है पाकिस्तान का प्रोजेक्ट लायनेस ?
पिछले महीने एजेंसियों की रिपोर्ट थी कि पाकिस्तान या उसके आईएसआई ने भारत के खिलाफ जासूसी के लिए प्रोजेक्ट लायनेस के तहत 300 लड़कियों की भर्तियां की हैं। उन्हें इस तरह से ट्रेंड किया गया कि वह बड़े अफसरों को अपनी जाल में फंसाएं और दुश्मन मुल्क के लिए महत्वपूर्ण और खुफिया जानकारी जुटाकर उन तक पहुंचाएं। हमारी सहयोगी वेबसाइट वनइंडिया इंग्लिश की एक रिपोर्ट के मुताबिक मई में खुफिया एजेंसियों ने देश में एक हनी ट्रैप मॉड्यूल का खुलासा किया था, जो फेसबुक हैंडल fb.com/shaanti.patel.89737 का इस्तेमाल कर रहा था। इसके जरिए जासूस कंप्यूटर संसाधनों से जुड़े कुछ बहुत ही प्रतिबंधित डेटा चुराने में कामयाब भी हुए।

3,500 करोड़ का पाकिस्तानी खेल!
विकिपीडिया के मुताबिक हनी ट्रैप खुफिया जानकार जुटाने का एक ऐसा तरीका है, जिसमें जानकारी हासिल करने के लिए रोमांस और यहां तक कि शारीरिक संबंध बनाने तक का ऑफर दिया जाता है। हालांकि, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी भारत के खिलाफ जो हनी ट्रैप का कारोबार चला रही है, उसके बारे में अधिकारियों ने कहा है कि इसमें सेक्स और कैश दोनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। भारत में आमतौर पर हनी ट्रैप के दो तरह के मामले देखे जाते हैं। एक में अधिकारियों को जानकारी जुटाने के लिए उनके साथ बनाए गए संबंधों को लेकर ब्लैकमेल किया जाता है। इसमें संबंधित महिला अश्लील तस्वीरों को शेयर करने की बात कहकर डराती हैं। आजकल इस धंधे में ऑनलाइन की गई अश्लील बातों को भी हथियार बनाकर महिलाएं इस्तेमाल करने लगी हैं। पाकिस्तान इस गोरखधंधे में हजारों करोड़ रुपये फूंक रहा है।

सेना में भर्ती होने वाले युवाओं को भी बना रहा है टारगेट
दूसरे तरीके में खुफिया जानकारी देने के बदले कैश का ऑफर दिया जाता है। आईएसआई के एजेंट संबंधित अफसरों को सूचना के लिए 5 से 10 लाख तक देने के लिए आसानी से तैयार हो जाते हैं। यह रकम खुफिया जानकारी की अहमियत पर निर्भर होती है। रकम खुफिया जानकारी देने वाले अधिकारियों के पद और रैंक के मुताबिक भी तय होती है। हाल ही में आईबी ने मंत्रालय को जानकारी दी है कि 2017 में आईएसआई ने भारतीय सेना में भर्ती होने वाले या उसकी तैयारी में लगे युवाओं को टारेगट करने का अभियान चलाया था। आईएसआई ऐसे 200 युवा सैनिकों को टारगेट करने की कोशिश में था और पाकिस्तानी एजेंट इनमें से 50 से ज्यादा के साथ संपर्क भी कायम कर चुके थे।

देश के कई हिस्सों में है सक्रिय हैं आईएसआईए के एजेंट-रिपोर्ट
रोहतक के गौरव कुमार को जब पुलिस ने गिरफ्तार किया था तो पता चला कि उससे कहा गया था कि वह जब भी आर्मी ट्रेनिंग कैंप में जाए तो वहां की तस्वीरें खींच ले। वह आर्मी में भर्ती होना चाहता था और उसी के लिए ट्रेनिंग ले रहा था। मतलब, वह भारतीय सेना का हिस्सा बनता, उससे पहले ही आईएसआई ने उसे अपनी जाल में फंसा लिया था। जानकारी के मुताबिक वह 18 आर्मी भर्तीय कैंप जा चुका था और कथित तौर पर वहां से जुड़ी जानकारियां शेयर भी कर चुका है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी फरीदकोट समेत भारत के कई जगहों पर अफसरों को फंसाने के लिए अपना मॉड्यूल स्थापित कर चुका है। ऐसे मॉड्यूल राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में हैं, जो फरीदकोट को रिपोर्ट करते हैं।

सोशल मीडिया के जरिए भी चल रहा है खेल
आईएसआई हनी ट्रैप के अपने कारनामे को पूरी साजिश के तहते अंजाम देने में लगा हुआ है। पहले इसके एजेंट सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल तैयार करते हैं और उसी के जरिए चैटिंग शुरू करते हैं। जब उन्हें सही टारगेट मिल जाता है तो वह उसे खास तरह की (Hookup chat site)साइट पर ले जाते हैं। वहीं पर सारी जानकारियां शेयर होती हैं। लेकिन, भारतीय एजेंसियों के सामने समस्या यह आती है कि कि जब कोई व्यक्ति उस खास तरह की साइट से लॉग आउट होता है तो उससे सारे चैट खुद ही डिलीट भी हो जाते हैं।

सुरक्षा एजेंसियों की आगे और बढ़ सकती है चुनौती
पाकिस्तान की इस खौफनाक खेल के बारे में जिस अधिकारी ने जानकारी दी है, उसके मुताबिक यह चुनौती आगे और बढ़ सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आईएसआई पर निगरानी रखने का असर यह हुआ है कि वह जिस हद तक खेल करना चाहता था या उसकी उम्मीद लगाए बैठा था, उतनी उसे मदद नहीं मिल पाई है। (तस्वीरें- प्रतीकात्मक)












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