FAO Report का खुलासा, पाकिस्तान में भुखमरी की भयावह तस्वीर, 22% आबादी को खाद्य असुरक्षा का संकट
Pakistan Starvation Report: संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन ने हाल ही में दुनिया के सामने एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने रखी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में भूख और कुपोषण की स्थिति और खराब हुई जो बेहद चिंताजनक है।
रिपोर्ट के मुताबिक 53 देशों में 29.5 करोड़ लोग भूख से प्रभावित रहे। इस आंकड़ें के मुताबिक साल 2023 की तुलना में पूरी दुनिया में भूखे रहने वालों की संख्या में 1.37 करोड़ की वृद्धि हुई है।

FAO Report: पाकिस्तान में खाद्य संकट गहराया
UN के इस संगठन ने पाकिस्तान में खाद्य असुरक्षा की स्थिति की गंभीरता को लेकर भी चेतावनी जारी की है जो मानवीय संकट का रूप लेती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र की खाद्य और कृषि संगठन (FAO) द्वारा हाल ही में जारी की गई 2025 ग्लोबल रिपोर्ट ऑन फूड क्राइसिस में बताया गया है कि नवंबर 2024 से मार्च 2025 तक पाकिस्तान के ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 1.1 करोड़ (11 मिलियन) लोग तीव्र खाद्य असुरक्षा (acute food insecurity) की चपेट में रहेंगे। यह आंकड़ा देश की कुल विश्लेषित जनसंख्या का 22 प्रतिशत है।
यह संकट विशेष रूप से बलूचिस्तान, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा के 68 बाढ़ प्रभावित जिलों में व्याप्त है, जहां जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, इन लोगों में से 17 लाख लोग 'आपातकालीन' स्थिति में हैं, जो Integrated Food Security Phase Classification (IPC) के तहत सबसे गंभीर स्तरों में से एक माना जाता है।
Pakistan Starvation Report: 2024 की तुलना में इस साल की स्थिति अधिक चिंताजनक
FAO की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2024 के पीक के दौरान 3.67 करोड़ लोगों का विश्लेषण किया गया था, जबकि 2025 के लिए यह आंकड़ा बढ़कर 5.08 करोड़ हो गया है। यानी 25 अतिरिक्त जिलों को शामिल करते हुए विश्लेषण क्षेत्र में 38 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस कारण, 2024 और 2025 के आंकड़ों की प्रत्यक्ष तुलना करना कठिन हो गया है।
2024 के पीक के दौरान भी स्थिति गंभीर थी, जब नवंबर 2023 से जनवरी 2024 के बीच 1.18 करोड़ लोग तीव्र खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे थे। इनमें 22 लाख लोग आपातकालीन श्रेणी में थे।
Pakistan Starvation Report: बच्चों और महिलाओं में कुपोषण की गंभीरता
रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च 2023 से जनवरी 2024 के बीच लगभग 21 लाख बच्चे (6 से 59 माह की आयु के) तीव्र कुपोषण (acute malnutrition) का शिकार हुए। इन बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल सका, ना गुणवत्ता में और ना ही मात्रा में। यह स्थिति सर्दियों के दौरान और खराब हो गई जब खाद्य कीमतें बढ़ गईं, रोजगार के अवसर सीमित हो गए और बाजारों तक पहुंच भी मुश्किल हो गई।
इसके साथ ही, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा में गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं में भी तीव्र कुपोषण पाया गया। इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में बच्चों का जन्म कम वजन के साथ हुआ, जो उनके स्वास्थ्य और भविष्य के लिए गंभीर खतरा है।
FAO की रिपोर्ट यह भी दर्शाती है कि पाकिस्तान के कई जिलों में डायरिया, तीव्र श्वसन संक्रमण (ARI) और मलेरिया जैसी बीमारियां उच्च स्तर पर बनी हुई हैं, जो सर्दियों के दौरान और अधिक बढ़ जाती हैं। 2022 की विनाशकारी मानसून बाढ़ के कारण कई क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की भी भारी कमी हो गई है।
खराब स्वास्थ्य सेवाएं, सड़कों का बाधित होना और पर्याप्त फंड की कमी ने पोषण सेवाओं की पहुंच को सीमित कर दिया है। सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं की ओर झुकाव भी कम है, जिससे स्थिति और बिगड़ रही है।
Pakistan Starvation Report: जलवायु परिवर्तन बना मुख्य कारक
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि 2025 में जलवायु संबंधित झटके (climate shocks)-जैसे कि सूखा, बाढ़, और असामान्य मौसम की घटनाएं-खाद्य असुरक्षा और कुपोषण की पहले से ही गंभीर स्थिति को और अधिक बिगाड़ सकते हैं। खेती और पशुपालन जैसे आजीविका के साधनों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा है, जिससे लोगों की खाद्य सुरक्षा और आय दोनों प्रभावित हुई हैं।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि पाकिस्तान सरकार और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां मिलकर ठोस कदम उठाएं। खाद्य सहायता, पोषण सेवाएं, स्वास्थ्य देखभाल, स्वच्छता, और जलवायु-लचीले समाधानों की तत्काल आवश्यकता है ताकि इस संकट को और गहराने से रोका जा सके।
FAO की इस रिपोर्ट से स्पष्ट है कि पाकिस्तान में खाद्य असुरक्षा और कुपोषण केवल मानवीय नहीं, बल्कि एक सामाजिक और आर्थिक चुनौती बन चुकी है, जिसे तत्काल नीति और व्यावहारिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है।












Click it and Unblock the Notifications