Jewar Airport: पहले 'नेट जीरो एमिशन' हवाईअड्डे का क्या है मतलब?
गौतम बुद्ध नगर, 25 नवंबर। गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोएडा के जेवर में बन रहे इंटरनेशनल एयरपोर्ट का शिलान्यास किया। इस एयरपोर्ट की खासियतों के बारे में काफी चर्चा है। एयरपोर्ट की एक खासियत यह बताई जा रही है कि यह देश का पहला नेट जीरो एमिशन एयरपोर्ट होगा। हम आपको बताने जा रहे हैं कि नेट जीरो एमिशन का क्या मतलब होता है और किस एयरपोर्ट को हम नेट जीरो एमिशन एयरपोर्ट कह सकते हैं? इसी सप्ताह खबरों में है कि दिल्ली एयरपोर्ट 2030 तक नेट जीरो एमिशन एयरपोर्ट बनेगा। आगे बढ़ने से पहले हम आपको बता दें कि जब हम नेट जीरो एमिशन (नेट जीरो उत्सर्जन) कहते हैं तो इसका मतलब होता है नेट जीरो कार्बन एमिशन। कार्बन पर्यावरण को सबसे ज्यादा प्रदूषित कर रहा है जिस वजह से धरती के वातावरण का तापमान बढ़ रहा है। इसी को लेकर दुनियाभर में ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के खतरे की बात होती है। अभी नवंबर में ही ऑस्ट्रेलिया के ग्लास्गो में जलवायु परिवर्तन पर चर्चा के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ के बैनर तले 200 देश जमा हुए। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में नेट जीरो कार्बन एमिशन के लिए 2070 का लक्ष्य रखा। आइए सबसे पहले जानते हैं कि नेट जीरो एमिशन होता क्या है?

नेट जीरो एमिशन मतलब कार्बन उत्सर्जन पर पूरी तरह रोक
ग्लास्गो में हुए जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में भी नेट जीरो एमिशन नीति पर देशों के बीच चर्चा हुई। जैसा कि स्पष्ट है कि नेट जीरो कार्बन एमिशन या नेट जीरो एमिशन एक नीति है जिसके तहत कार्बन के उत्सर्जन को कम से कम करने का प्रयास होता है, साथ ही ऐसे उपाय किए जाते हैं जिससे बचे-खुचे उत्सर्जित हो रहे कार्बन को सोखा जा सके। नेट जीरो एमिशन के साथ एक और टर्म की चर्चा होती है- कार्बन न्यूट्रैलिटी। वैसे तो कार्बन न्यूट्रैलिटी और नेट जीरो कार्बन एमिशन को एक-दूसरे के बदले इस्तेमाल किया जाता है लेकिन दोनों के बीच फर्क भी किया जाता है। कार्बन न्यूट्रैलिटी का मतलब होता है कि कार्बन का उत्सर्जन तो हो लेकिन उसको सोखने के लिए उपाय किए जाएं। इसको और स्पष्ट तरीके से ऐसे समझें कि जीरो कार्बन एमिशन में जहां ऐसे उपायों को किया जाता है जिससे कार्बन का ही कम से कम उत्सर्जन हो वहीं कार्बन न्यूट्रैलिटी में ऐसे उपायों पर जोर है जिससे उत्सर्जित हो रहे कार्बन को सोखा जा सके।

नेट जीरो एमिशन का मकसद वातावरण में कार्बन का संतुलन
नेट जीरो एमिशन और कार्बन न्यूट्रैलिटी दोनों का एक ही मकसद है, वातावरण में कार्बन के संतुलन को बनाना। धरती के लिए कार्बन भी जरूरी है लेकिन इसकी मात्रा के बढ़ने से धरती को खतरा भी है। देश विकास की प्रकिया के दौरान भारी मात्रा में कार्बन का उत्सर्जन कर चुके हैं और अभी भी कर रहे हैं। यूरोपियन यूनियन, अमेरिका, चीन के बाद कार्बन उत्सर्जन में भारत चौथे नंबर का देश है। जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि वातावरण में कार्बन की मात्रा बढ़ने से धरती का तापमान बढ़ने और जलवायु परिवर्तन के खतरे बढ़ रहे हैं। इसलिए कार्बन की मात्रा को कम करने और संतुलित करने के लिए नेट जीरो एमिशन की बात होती है। अब तक हमने जाना कि नेट जीरो एमिशन के तहत कम से कम कार्बन उत्सर्जन के प्रयास किए जाते हैं। इसी संदर्भ में हम एयरपोर्ट पर किए गए उन उपायों को समझेंगे जिससे इसके संचालन में कार्बन कम से कम निकले।

नेट जीरो एमिशन एयरपोर्ट के लिए एनवायरनमेंट सस्टेनेबल मैनेजमेंट
एविएशन उद्योग में विमानों के संचालन से लेकर एयरपोर्ट के रखरखाव तक में कार्बन की अच्छी खासी मात्रा का उत्सर्जन होता है। कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए ईंधन के तौर पर सबसे पहले कोयला, तेल और गैस के इस्तेमाल को कम से कम करने पर जोर दिया जाता है। साथ ही एयरपोर्ट पर तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर की मदद से कार्बन उत्सर्जन को रोकने और सोखने के उपाय किए जाते हैं। उदाहरण के लिए जब दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने कहा कि 2030 तक दिल्ली एयरपोर्ट को नेट जीरो एमिशन बना दिया जाएगा तब उसने इसके लिए उपायों का भी जिक्र किया। दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने कहा कि इसके लिए एनवायरनमेंट सस्टेनेबल प्रोग्राम के तहत कई उपाय किए जाएंगे जिनमें टैक्सीबोट और इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल भी शामिल है। टैक्सीबोट एक रोबोटिक वाहन है जिसको चलाने के लिए इंजन का इस्तेमाल नहीं होता। इसके जरिए विमान को टेक ऑफ जोन तक ले जाया जाता है। इससे कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलती है। वहीं इलेक्ट्रिक वाहन भी कार्बन उत्सर्जन कम करते हैं। एयरपोर्ट के संचालन के लिए रिन्यूएबल एनर्जी (जैसे सोलर एनर्जी) के ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल के लिए ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने समेत अन्य कई उपाय किए जाते हैं जिससे कार्बन का मैनेजमेंट हो सके। विमानों में सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल के उपयोग की भी चर्चा हो रही है ताकि हवाई यात्रा के प्रदूषण को कम किया जा सके। तो नोएडा में बन रहे इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण में भी इसी तरह के उपाय किए जाएंगे ताकि नेट जीरो एमिशन के लक्ष्य को पाया जा सके।
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