भारत के डॉक्टर का कमाल: हार्ट फेल के मरीज को कृत्रिम दिल लगाकर तीन साल तक जिंदा रखा, असली दिल को कर दिया ठीक

नोएडा, 6 अक्टूबर। मेडिकल साइंस में मरीज के इलाज के दौरान कुछ ऐसे अच्छे परिणाम निकलते हैं कि डॉक्टर भी चौंक जाते हैं। जिस मरीज का हार्ट फेल हो रहा हो और वो कृत्रिम दिल के सहारे जिंदा रहने की जद्दोजहद कर रहा हो, फिर अचानक उसे पता चले कि उसके शरीर का दिल पूरी तरह से ठीक होकर धड़क रहा है तो यह उसके लिए कितनी खुशी की बात होगी। ऐसे ही एक मरीज की बात हम कर रहे हैं जो है तो इराक का नागरिक लेकिन उसका इलाज भारत में हुआ। भारत के डॉक्टर का आभार जताते हुए मरीज ने कहा कि उन्होंने मुझे दो बार जीवनदान दिया है। इराक के इस मरीज को दो बार जीवनदान कैसे मिला, इसकी पूरी कहानी जानकर आप भी हैरान होंगे। डॉक्टर भी इस मामले को रेयर केस बता रहे हैं, मतलब ऐसा होना वाकई अचंभित करने वाला है।

मरीज के अंदर से निकाला जा चुका है कृ्त्रिम दिल

मरीज के अंदर से निकाला जा चुका है कृ्त्रिम दिल

इराक के नागरिक हनी जवाद मोहम्मद नोएडा के फोर्टिस हार्ट एंड वस्क्युलर इंस्टीट्यूट में हार्ट फेल होने का इलाज करा रहे हैं। हार्ट फेल के मरीज का दिल पूरी क्षमता के साथ काम नहीं करता है। हनी जवाद के शरीर में डॉक्टर ने कृत्रिम दिल लगाया था। अब वो मशीनी दिल डॉक्टर ने निकाल दिया है क्योंकि मरीज का असली दिल पूरी क्षमता के साथ काम करने लगा है। डॉक्टर इसे चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं। डॉक्टर का कहना है कि दुनियाभर में सिर्फ तीन मरीजों का दिल ही इस तरह से हार्ट फेल होने के बावजूद रिकवर कर पाया है। डॉक्टर का दावा है कि भारत में हनी जवाद का फेल हो रहा हार्ट पूरी तरह से ठीक होना, देश का पहला मामला है।

2018 में शुरू हुआ था हनी जवाद का इलाज

2018 में शुरू हुआ था हनी जवाद का इलाज

फोर्टिस हार्ट इंस्टीट्यूट के चेयरमैन डॉक्टर अजय कौल के मुताबिक, इराकी नागरिक हनी जवाद मोहम्मद 2018 में जब इलाज कराने आया था तो उसका हार्ट ठीक से काम नहीं कर रहा था। वह बेड पर रहता था, चल नहीं पाता था। हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए अभी उसे लंबा इंतजार करना था तब तक उसकी जिंदगी को बचाने के लिए आर्टिफिशियल हार्ट लगाया गया। इस आर्टिफिशियल हार्ट को लेफ्ट वेंट्रिकल असिस्ट डिवाइस (LAVD) कहते हैं। डॉक्टर अजय कौल ने बताया कि हनी जवाद का अपना दिल तीन साल में इतना ठीक हो चुका है कि अब कृत्रिम दिल की जरूरत नहीं है।

हनी जवाद को दो बार डॉक्टर ने दिया जीवनदान

हनी जवाद को दो बार डॉक्टर ने दिया जीवनदान

डॉक्टर अजय कौल ने कहा कि हनी जवाद का हार्ट फेल हो रहा था जिसकी जगह आर्टिफिशयल हार्ट को लगाना बड़ी चुनौती थी। इसमें डॉक्टरों को कामयाबी मिली। आर्टिफिशियल हार्ट मशीन है जिसका तार सीने से बाहर रहता है। शरीर में छेद के माध्यम से तार और बैटरी बाहर रहती है जिसको चार्ज करना होता है। मरीज को आर्टिफिशियल हार्ट लगाने के बाद दो हफ्ते में डिस्चार्ज कर दिया गया। छह महीने पर उनको उनको अस्पताल जांच कराने के लिए आने को कहा गया। हनी जवाद इसके बाद लगातार अस्पताल आते रहे और जांच में पाया गया कि उनका अपना दिल रिकवर कर रहा है। डॉक्टरों ने जब यह देखा कि मरीज का दिल धड़क रहा है तो पहले आर्टिफिशियल हार्ट की स्पीड को कम किया गया। आखिर में जब डॉक्टर को लगा कि अब मरीज का दिल पूरी क्षमता से काम कर रहा है तो उन्होंने मशीन को निकाल दिया।

डॉक्टर ने कहा - दुर्लभ मामला है

डॉक्टर ने कहा - दुर्लभ मामला है

हनी जवाद पिछले तीन साल से फोर्टिस के डॉक्टरों की निगरानी में हैं। डॉक्टर अजय कौल ने आगे बताया कि जांच में पाया गया कि आर्टिफिशियल हार्ट के सहारे जी रहे हनी जवाद का हार्ट एक साल के अंदर ही ठीक होने लगा था। अगले दो साल तक उनके स्वास्थ्य पर नजर रखी गई। जब डॉक्टर आश्वस्त हो गए कि हनी जवाद अब अपने दिल के सहारे जी सकते हैं तो उन्होंने आर्टिफिशियल हार्ट को हटा दिया। फोर्टिस अस्पताल में डॉक्टरों ने पहली बार आर्टिफिशयल हार्ट लगाने और मरीज के ठीक होने पर उसे निकालने के ऑपरेशन को किया। हनी जवाद को अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा चुका है। हार्ट रिकवर करने के दौरान वो एक बच्चे के बाप भी बन चुका है।

रेस्ट मिलने पर ठीक होता है शरीर का अंग

रेस्ट मिलने पर ठीक होता है शरीर का अंग

फेल हो रहा हार्ट कैसे ठीक हो गया? इस सवाल के जवाब में डॉक्टर अजय कौल ने कहा कि शरीर के अंग को जब आराम मिलता है तो उसकी हीलिंग होती है। उन्होंने कोरोना काल का उदाहरण देते हुए कहा कि मरीज के फेफड़े में संक्रमण होने पर उनको मशीन पर रखा गया जिससे फेफड़े को आराम मिला तो मरीज रिकवर कर गया। इसी तरह से मरीज का हार्ट फेल होता है तो उसको आर्टिफिशियल हार्ट का सहारा दिया जाता है। इससे मरीज के हार्ट को आराम मिलता है और ठीक होने का मौका भी। उन्होंने कहा कि एक से दो प्रतिशत मरीजों में ऐसा होता है कि हार्ट ठीक होने के बाद भी कुछ दिन में काम न करे, इसके लिए कुछ समय तक मरीज की निगरानी की जाती है।

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