झूठ बोलकर अपने ही बयान पर फंस गए केजरीवाल

arvind kejriwal
नयी दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने ही बयानों में घिरते नजर आ रहे हैं। जनलोकपाल पर दिए अपने बयान पर खुद केजरीवाल फंसते दिखाई दे रहे हैं। दरअसल कल आम आदमी पार्टी और दिल्ली सरकार ने जिन कानूनविदों की राय के आधार पर जनलोकपाल बिल को संवैधानिक होने का दावा किया था, अब उस पर ही सवाल उठने लगा है।

केजरीवाल के दावों की हवा निकालते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएन भट्ट ने एक निजी समाचार चैनल पर दावा किया है कि जनलोकपाल बिल पर गृह मंत्रालय के अधिकार के बारे में केजरीवाल की उनसे किसी तरह की बात नहीं हुई थी। भट्ट ने उप राज्यपाल को कांग्रेस का एजेंट बताए जाने पर भी ऐतराज किया।

जनलोकपाल बिल पर केजरीवाल सरकार उपराज्यपाल को चिट्ठी लिखी। इस चिट्ठी में उन्होंने दावा किया कि उन्होंने जनलोकपाल पर संविधान विशेषज्ञों की राय ली है। केजरीवाल ने दावा किया कि दिल्ली सरकार को बिना केंद्र की इजाजत के भी जनलोकपाल बिल लाने का पूरा संवैधानिक हक है। केजरीवाल ने अपनी दलील के समर्थन में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश मुकुल मुद्गल, वरिष्ठ वकील पीवी कपूर, पिनाकी मिश्र और पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएन भट्ट की राय होने का हवाला दिया। लेकिन केएन भट्ट ने केजरीवाल के दावों की हवा निकाल दी।

पूर्व सॉलिसिटर जनरल केएन भट्ट ने केजरीवाल पर साफ-साफ गलतबयानी का इल्जाम मढ़ा। उन्होंने केजरीवाल पर तथ्यों के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया और आप नेता आशुतोष द्वारा दिल्ली के उपराज्यपाल को कांग्रेस का एजेंट करने पर आपत्ति जताई। गौरतलब है कि दिल्ली सरकार के बिल को संविधान के खिलाफ बताए जाने के बाद से ही आम आदमी पार्टी ने हमलावर रुख अपना लिया था।

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