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आफत बना आमलेट : मोरनी के अंडों के छिलकों की होगी फोरेंसिक लैब में जांच, सता रहा 7 साल की सजा का डर, जानिए वजह?

नोएडा, 14 जुलाई: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में चार युवकों को अंडे का आमलेट बनाकर खाना महंगा पड़ सकता है। दरअसल, ये अंडे मुर्गी के नहीं बल्कि मोरनी के थे और युवकों ने अंडों को चुराया। घर ले गए और आमलेट बनाकर खा गए। ग्रामीणों को जब इस बात की जानकारी हुई तो उन्होंने विशेष समुदाय के चार युवकों पर राष्ट्रीय पक्षी के अंडे चोरी करने का आरोप लगाकर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने शिकायत मिलने पर जांच शुरू कर दी है।

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    मोरनी के अंडों को चुराकर आमलेट बनाया

    मोरनी के अंडों को चुराकर आमलेट बनाया

    पुलिस के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा गांव के कुछ ग्रामीणों की ओर से इस बाबत शिकायत मिली है। शिकायत में कहा गया है कि हाल ही में जेवर तहसील के बीरमपुर गांव में एक मोरनी ने खाली भूखंड में चार अंडे दिए थे। सोमवार की शाम गांव के चार लोगों ने उन अंडों को लेकर घर पर आमलेट बनाया और खा लिया। ग्रामीण सुरेश के मुताबिक, मोरनी जब जंगल से लौटी तो अंडे नहीं दिखने पर विचलित हो गई और शोर मचाकर इधर-उधर भटकने लगी। ग्रामीणों ने तोरई के बेल के पास जाकर देख तो उन्हें अंडे चोरी होने की जानकारी हुई।

    अंडों के छिलकों की होगी फोरेंसिक लैब में जांच

    अंडों के छिलकों की होगी फोरेंसिक लैब में जांच

    घटना से स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। जानकारी करने पर एक बच्चे ने उन्हें बताया कि उसने विशेष समुदाय के चार लड़कों को अंडे ले जाते हुए देखा है। ग्रामीण आरोपियों के घर पहुंचे तो आरोपियों ने कहा कि अंडों का उन्होंने आमलेट बनाकर खा लिया है। ग्रामीणों ने मामले की शिकायत पुलिस से की। पुलिस ने एक युवक के घर पहुंचकर पूछताछ की और छिलके बरामद किए। इस मामले में थाना प्रभारी दिनेश यादव कहना है कि पुलिस जांच कर रही है। अंडों के छिलकों को फोरेंसिक लैब में जांच के लिए भेजा जाएगा। आरोप सही पाए जाने पर आरोपियों पर रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई होगी।

    दोष साबित होने पर 7 साल तक की हो सकती है सजा

    दोष साबित होने पर 7 साल तक की हो सकती है सजा

    इस मामले में वन अधिकारियों का कहना है कि मोर राष्ट्रीय पक्षी है। इसका शिकार, अंडे नष्ट करना और खाना आदि वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत गैरकानूनी है। दोष साबित होने पर इसमें सात साल तक की सजा का प्रावधान है। रबूपुरा गांव का मामला वन अधिकारियों के संज्ञान में है। वन विभाग की टीम भी जांच करेगी।

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