UP STF Noida की बड़ी कार्रवाई: फर्जी टेलिफोन एक्सचेंज का भंडाफोड, कॉल के लिए अपराधी करते थे इस्तेमाल
कैसे एक बीएससी पास जो नेटवर्किंग में भी काम कर चुका है, उसने एक फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज बनाकर सरकार को करोड़ों का चूना लगा दिया। यह टेलीफोन एक्सचेंज अपराधियों के लिए काम कर रहा था।

नोएडा पुलिस और यूपी एसटीएफ ने बड़ा सनसनीखेज खुलासा किया है। पुलिस ने शहर में चल रहा गैरकानूनी टेलिफोन एक्सचेंज पकड़ा है। कुख्यात अपराधी कारोबारियों की जासूसी करने, हवाला ट्रेडिंग करने, स्मगलिंग करने और फिरौती मांगने के लिए इस टेलीफोन एक्सचेंज का इस्तेमाल कर रहे थे। नोएडा पुलिस ने बताया कि एक तरफ यह टेलीफोन एक्सचेंज अपराधियों के लिए काम कर रहा था तो दूसरी ओर भारत सरकार को आर्थिक हानि पहुंचा रहा था।

क्या है पूरा मामला
स्पेशल टास्क फोर्स ने अंतररराष्ट्रीय टेलीफोन एक्सचेंज का संचालन करने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर सेक्टर-20 से सरगना समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है। 24 घंटे के भीतर टेलीफोन एक्सचेंज के मामले में एसटीएफ की यह दूसरी कार्रवाई है। गिरोह द्वारा इंटरनेशनल वाइस कॉल को निजी सर्वर में लैंड कराकर कॉल कराई जा रही थी। इससे भारत सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा था।
आरोपियों के पास ये सामान हुआ बरामद
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गाजियाबाद के सगरना अंश कुमार व दरभंगा बिहार के कन्हैया कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 4 मोबाइल, एस्क्यूबी-300, 10 चेकबुक, 9 एटीएम कार्ड, पेन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, सीपीयू, राउटर, डेल सर्वर, कनेक्टिंग केबल बरामद किया है।
मामले को लेकर अधिकारियों का क्या कुछ कहना हैं
एएसपी एसटीएफ नोएडा राज कुमार मिश्रा ने बताया कि महोतो बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा एसआइपी प्राप्त कर सेक्टर-20 स्थित ए-44 बी-5 के बेसमेंट में अवैध टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित किये जाने की सूचना मिली थी। जिसके बाद टीम दूरसंचार विभाग एवं टाटा टेली सर्विसेस लिमिटेड नोएडा के अधिकारियों ने फेज-1 कोतवाली पुलिस के साथ बृहस्पतिवार शाम साढ़े आठ बजे मौके पर पहुंच भंडाफोड़ किया है।

आरोपियों ने ऐसे शुरू किया था अवैध काम
आरोपी कन्हैया कुमार गाजीपुर दिल्ली स्थित पाथ व्यूवर ( Path Viewer ) नामक कम्पनी में आईटी सोल्यूशन प्रोवाइडर के तौर पर कार्य किया था। वर्ष 2014 से 2017 तक एआरवाई टेलीकाम दिल्ली में काम करता था। जहां पर पीआरआई सर्वर के कान्फ़िगरेशन का काम सीखा, उसके बाद फ्रीलांसर के तौर पर डायल सपोर्ट का काम करने लगा।
ऐसे किया था सेटअप
इसी दौरान उसकी मुलाकात अंश सक्सेना से हुई। अंश सक्सेना की मदद से चार माह पहले यह टेलीफोन एक्सचेंज का सेटअप बनाया। आरोपियों ने कान्फ़िगरेशन कर इंटीग्रेट किया। इसका प्रमोशन लिंकडिन पेज पर किया था। जहां से तीन क्लाइंट आइपीपेज स्टाइल, आइपेज और यूकोम लिंक्डिन के स्काइप पर संपर्क किया और स्काइप पर सर्वर की आइपी शेयर करता था। जिसके बाद ही सर्वर पर कॉल आनी शुरू होती थी।
बिटकॉइन से होता था भुगतान
ये वाइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआइपी) सर्वर पर देश के दूरसंचार नेटवर्क को बाईपास कर लैंड करता था। फिर देश के विभिन्न कोने में इसके माध्यम से बात होती थी। इसके लिए 20 से 50 पैसा प्रति मिनट उसे मिलता था, जो यशपाल के खाते में या बिनेंस प्लेटफार्म पर यूएसडीटी खाते में बिटकॉइन से भुगतान होता था।
पहले भी जा चुका है जेल
आपको बता दें कि आरोपी अंश सक्सेना बीसीए पास है। वर्ष 2010 में प्रोगेसिव इन्फोटेक नोएडा में काम करता था। इसके अलावा दिल्ली के कॉल सेंटर क्लिक एंड गो एवं दूर एंड टैवल में डेढ़ साल तक काम कर चुका है। वर्ष 2021 में अंशुल मेहता के साथ फर्जी कॉल सेंटर गुरुग्राम (हरियाणा) में चला रहा था। जिसमें उसे सोहना रोड से जेल भी जाना पड़ा था। इसी गुरुग्राम वाले दफ्तर में उसकी मुलाकात कन्हैया कुमार से हुई थी।
फर्जी आधार कार्ड से कंपनी तैयार
कन्हैया कुमार ने ही यशपाल के नाम से फर्जी आधार कार्ड व दस्तावेज बनवाकर महतो बिल्डकान प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी बनाकर फर्जी एग्रीमेंट तैयार कर किया और फिर नोएडा में आफिस लिया था। जहां पर अवैध टेलीफोन एक्सचेंज लगाकर देश भर में विदेश में बैठे लोगों की देश के गेटवे को बाईपास करके बात कराई जा रही थी।












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