कांग्रेस के प्रचार पोस्टर में मनमोहन, सोनिया नहीं सिर्फ राहुल

अरूण के अनुसार यह आश्चर्यजनक है कि जनवरी के अंत में ही कांग्रेस ने प्रचार करना शुरू कर दिया है जबकि प्रचार अभियान नामांकन के बाद दो सप्ताह तक के लिए होता है। अरूण का कहना है कि चुनाव का विज्ञापन देना काफी महंगा होता है, कई माध्यम तो चुनाव प्रचार के लिए कई किस्तों में धन लेते है। चुनाव प्रचार मुख्यत: नामांकन के बाद शुरू होता है और लगभग दो सप्ताह तक जारी रहता है।
अरूण ने प्रचार के पोस्टरों में प्रधानमंत्री और सोनिया गांधी की तस्वीरों को जगह न देने और राहुल को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित न करने पर कहा है कि कांग्रेस, राहुल को हार से बचाना चाहती है। वह यह जता देना चाहती है कि अगर पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहता है तो उसकी जिम्मेदारी राहुल गांधी की होगी लेकिन अगर पार्टी हार जाती है तो वह सिर्फ कांग्रेस की हार होगी राहुल गांधी की नहीं।
हालांकि कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि उन्होने प्रचार के लिए ज्यादा पैसा नहीं खर्च किया है। अरूण ने सवाल उठाते हुए कहा है कि क्या ऐसा हो सकता है, सरकार का कार्यकाल सवालों के घेरे में रहा हो, उसके लीडर विज्ञापनों के द्वारा अपनी छवि बना सकते हों। इससे कांग्रेस को कोई लाभ हासिल होने वाला नहीं है।












Click it and Unblock the Notifications