नैना साहनी को तंदूर में भूनने वाले सुशील को फांसी नहीं उम्रकैद

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस रंजना देसाई ने मंगलवार को मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि सुशील ने गुस्से में आकर गोली चलायी थी, लिहाजा यह रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस नहीं हो सकता।
कैसे की थी हत्या
2 जुलाई 1995 की रात नैना सहानी अपने एक पूर्व सहपाठी व कांग्रेस नेता मतलूब करीम से फोन पर बात कर रही थी। तभी उसका पति सुशील शर्मा कमरे में आ गया। नैना फोन पर बात जारी रखती है। सुशील को गुस्सा आ जाता है और वह उस पर गंदे-गंदे लानछन लगाने लगा। इसी बीच दोनों में अनबन होती है और सुशील अपनी लाईसेंसी रिवाल्वर निकाल कर नैना के माथे पर गोली मार दी। दूसरी गोली उसकी गर्दन पर और तीसरी मिस हो कर एयरकंडीशन्ड पर जा लगती है।
सुशील नैना के शव को ठिकाने लगाने के लिये वह नैना का शव लेकर अपने ही भगिया रेस्तरां ले गया। वहां सुशील ने सभी ग्राहकों व कर्मचारियों को जाने के लिये कहा। रेस्तरां खाली होने के बाद वह नैना का शव रेस्तरां के किचन में ले गया और वहां उसने शव के टुकड़े किये और एक-एक कर तंदूर में डाल दिये। तंदूर रेस्तरां के पीछे था, तो पास के घर में सो रही दूध बेचने वाली नरोरा देवी ने देख लिया।
उसने आकर सुशील से पूछा कि भईया इतनी रात को तंदूर में क्या भून रहे हो, सुशील ने उसे झिड़क दिया और वहां से जाने को कहा। नरोरा को शक हुआ तो उसने रेस्तरां के पीछे के दरवाजे के पास खून पड़ा देखा। उसने तुरंत आस-पास के लोगों के पास जाकर चिल्लीा-चिल्ला कर कहा- तंदूर में मुर्दा जल रहा है। सुशील तुरंत ही मौके से फरार हो गया।
मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को आधी जली हुई हालत में निकाला। पोस्टमॉर्टम में शव से दो गोलियां बरामद हुईं। तब तक सुशील मुंबई निकल गया। मुंबई से भागते हुए चेन्नई और फिर बैंगलोर। लेकिन वहां उसे पकड़ लिया गया। 2003 में निचली अदालत ने इस नृशंस हत्या के लिये उसे फांसी की सजा सुनाई।












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