भाजपा नहीं अन्ना हजारे हैं केजरीवाल की चुनौती

इसके पहले दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम आने पर किरण बेदी ने इच्छा जताई थी कि भाजपा और 'आप' को मिलकर सरकार बनानी चाहिए, लेकिन केजरीवाल ने कांग्रेस का समर्थन लिया। किरण टीम अन्ना की प्रमुख सदस्य हैं अत: उनके बयान को अन्ना से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं आम जनता में अन्ना हजारे, केजरीवाल से अधिक विश्वसनीय है, अत: केजरीवाल को अन्ना की खिलाफत मुश्किल पड़ सकती है।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि केजरीवाल टीम के प्रमुख सदस्य प्रशांत भूषण राष्ट्रीय मुद्दों पर विवादास्पद बयान दे चुके हैं, उन्होने नक्सली क्षेत्रों और कश्मीर में जनमत संग्रह के आधार पर सेना तैनात किये जाने की बात कही थी। जिसने टीम केजरीवाल की राष्ट्रीय मुद्दों पर अपरिपक्वता उजागर कर दी। इसके कारण 'आप' को कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। केजरीवाल टीम के बारे में नब्बे के दशक में कश्मीर में विद्रोह को रोंकने के लिए तैनात रहे मेजर जनरल जी डी बख्शी का कहना कि शहरी मध्ययम वर्ग को प्रभावित करने के लिए केजरीवाल के पास सिर्फ 'भ्रष्टाचार' ही मुद्दा है। उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों को भी समझना चाहिए। हम मिश्र या ट्यूनिशिया जैसी क्रांति नहीं चाहते हैं।
केजरीवाल ने आज मीडिया में कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव भाजपा और 'आप' के बीच लड़े जाएंगे लेकिन उनके सामने विदेश नीति और अर्थव्यवस्था जैसी बड़ी चुनौतियां होंगी। इन समस्याओं से निपटने के लिए उनकी क्या योजना है इसका भी उन्हें खुलासा करना होगा। राजनीतिक पंडितों के अनुसार 'आप' लोकसभा में अधिकतम पचास सीटें ही ला सकती है फिलहाल केजरीवाल के सामने चुनौती टीम अन्ना ही है।












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