नायक अनिल कपूर से प्रभावित केजरीवाल, की भ्रष्ट कर्मचारियों की ऐसी-तैसी

छह महीने पहले शायद ही किसी ने सोंचा हो कि दिल्ली में एक ऐसी पार्टी सरकार बनाएगी जिसका नाम भी देश भर के लोगों की जुबां पर अभी नहीं चढ़ा है लेकिन डोर टू डोर अपने प्रचार अभियान और साफ सुथरी छवि के दम पर ढीली शर्ट और सैंडल पहनने वाले केजरीवाल ने वो कर दिखाया अभी तक जिसकी कल्पना ही भ्रष्टाचार और कुप्रशासन से ऊबी जनता करती थी। 'नायक' में अभिनेता ने एक दिन में ढ़ाई हजार करोड़ का टैक्स इकट्ठा कर अपने पद की ताकत को दिखाया था, वहीं केजरीवाल ने अपने मेनीफेस्टों में आधे दाम पर बिजली और मुफ्त पानी देने के वादे को पूरा किया।
सिर्फ दिल्ली में ही नहीं देश भर में अब केजरीवाल इफेक्ट देखा जा रहा है, उनको देखकर ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने सुरक्षा घेरे से 6 गाडि़यां घटाकर सिर्फ चार कर दी, वहीं राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी सरकारी बंगला लेने से इनकार कर दिया और अपनी सुरक्षा भी आधी कर दी। सुरक्षा न लेने की बात करने वाले केजरीवाल रील लाइफ के उस नायक के रूप में नजर आये जिसे लगता है कि वीवीआईपी लोगों की सुरक्षा में काफी पैसा खर्च होता है और इसे कम किया जा सकता है। केजरीवाल की तरह अन्य मुख्यमंत्री कब तक इस पर कायम रहते हैं ये तो वक्त ही बताएगा लेकिन देश में एक ऐतिहासिक शुरूआत हो चुकी है।
देश के इतिहास में यह पहली बार ही हुआ है जब एक राज्य में 800 अफसरों के तबादले हुए हों लगता है भ्रष्टाचार के खिलाफ दो साल पहले अन्ना हजारे के आंदोलन से शुरू हुई मुहिम का बेहतर आगाज तो हो ही गया है। अब सवाल ये भीउठता है कि केजरीवाल ने सत्ता में आने पर जिस कांग्रेस के खिलाफ जांच की बात कही थी, उस पर वह कैसे अमल करते हैं, क्या ये भी वैसे ही होगा जैसे फिल्म में एक दिन के लिए सीएम बने अनिल कपूर ने अमरीश पुरी को निलंबित कर दिया था या फिर कांग्रेस से समर्थन मिलने के बाद वह कॉमनवेल्थ और अन्य घोटालों को भुला देंगे।
इसके अलावा आम आदमी पार्टी ने देश में 200 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बना लिया है, ऐसे में भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करना ही उनके लिए अखबारों और टीवी पर सबसे अच्छा विज्ञापन कंटेंट हो सकता है जिससे दिल्ली विधानसभा चुनावों में पार्टी की अप्रत्याशित सफलता लोकसभा में भी दोहराई जा सकती है।












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