और ईस्ट दिल्ली में दिखा दी कूड़े ने अपनी ‘ताकत’
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) राजधानी में आज तेज हवाओँ के सात आई आंधी और बारिश के बाद कम से कम ईस्ट दिल्ली में कूड़े का राज है सड़कों से लेकर बाजारों में। विकास मार्ग, लक्ष्मी नगर, गांधी नगर,कृष्णा नगर में कूड़ा ही कूड़ा फैला है।
उधर, पूर्वी दिल्ली में एमसीडी की हड़ताल ख़त्म हो गई है पर सीलमपुर में लगता है अभी भी जारी है। इलाके में कूड़ा नही उठाया गया। और अभी तेज़ आंधी और साथ में बारिश आने बाद से इसी कूड़े से पूरे इलाके में बदबू फैल गई।
इस बीच,Top of Form
कूड़ा इन दिनों सुर्खियों में है। कूड़े की मौज है। कूड़े के दिन बदल गए है। वरिष्ठ पत्रकार और लेखक शशि झा कहते हैं कि कूड़े के सहारे सियासी पार्टियां अपने पुराने कूड़े को भुलाने और नए सिरे से कूड़ा फैलाने की जुगत में लग गई हैं।
जिन सत्ताधारी दल की वजह से कूड़ा फैला था, न्यायालय के फैसले के बाद अब वे कूड़ा समेटने तथा कूड़े में रोटियां सेंकने में लग गए हैं। जिन्होंने 15 साल से दिल्ली में कूड़ा फैलाया, उनके कार्यकर्ता भी मास्क लगाकर कूड़ा फेंकते नजर आ रहे हैं।
धर्मांधता का कूड़ा
दरअसल सबके अपने अपने कूडे हैं। कोई धर्मांधता का कूड़ा फैला रहा है तो कोई धर्मनिरपेक्षता के आवरण का। कोई कोई स्थानीय स्तर पर खाप का कूड़ा फैला कर ही अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ले रहा है। कूड़ा अनंत कूड़ा कथा अनंता।
यूं तो राजनीति से लेकर नौकरशाही तक सभी क्षेत्रों में कूड़े का ही बोलबाला है पर पत्रकारिता का कूड़ा इन दिनों ज्यादा बदबू फैलाता दिख रहा है। कोई पुराना कूड़ा किसी बड़े कूड़ेदान के ओहदे पर पहुंच कर अपने पुराने कूड़े को वहां बुलाना नहीं भूलता। इधर के कूड़े उधर जाकर कूड़े फैला रहे हैं।
कूड़ा ही कूड़ा
हर प्रकार के कूड़े के छपने पर उसे सराहना भी बदस्तूर मिलती ही रही है। अच्छा कूड़ा लिखा आपने। आप तो पहले भी कूड़ा लिखते रहे हैं पर इस बार अधिक कूड़ा था।













Click it and Unblock the Notifications