देखें: टीम केजरीवाल ने की ये पांच गलतियां

नई दिल्‍ली। दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके सहयोगी मंत्री चार पुलिस अधिकारियों के निलंबन की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार में रहते हुए केजरीवाल और उनकी टीम दिल्‍ली की डेढ़ करोड़ जनता से किये गये वादे और योजनाएं पूरी नहीं कर रहे हैं बल्कि उनके लिए चार पुलिस वालों का निलंबन एक बड़ा मुद्दा हैं। दिल्‍ली सरकार द्वारा किये जा रहे आंदोलन से आम आदमी की उम्‍मीदें धूमिल होती दिखाई दे रही हैं। यह ध्‍यान देने योग्‍य है कि लगभग दो दशक पहले वी पी सिंह ने भी देश को कांग्रेस के अलावा एक नया नेतृत्‍व देने की बात की थी लेकिन मौका मिलने पर भी वह प्रशासक के रूप में असफल रहे हैं।

कयास लगाये जा रहे हैं कि जो दो दशक पहले हुआ क्‍या वहीं इतिहास फिर दोहराया जाएगा। एक समय परिवर्तन की नई उम्‍मीद जगाने वाले केजरीवाल अब सबको खलनायक लगने लगे हैं। विश्‍लेषण किया जा रहा है कि केजरीवाल ने फ्री पानी और आधे दामों पर बिजली देने के वादे सिर्फ जनता को लुभाने के लिए किये और उन्‍हें पूरा कर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास किया, उन्‍होने जनता को स्‍थाई और बेहतर नेतृत्‍व देने के बारे में नहीं सोंचा। जिससे कि भाजपा और कांग्रेस के लिए एक विकल्‍प के रूप में नजर आ रही आम आदमी पार्टी अब धराशाई होती दिखाई दे रही है।

वी पी सिंह की असफलताएं सामने आने में एक साल का वक्‍त लग गया था लेकिन केजरीवाल ने तो एक मुख्‍यमंत्री के रूप में एक महीना भी नहीं पूरा किया है। इस आंदोलन ने यह भी देख लिया है कि केजरीवाल एक प्रशासक के रूप में नाकाम रहे हैं। जिसके बाद लोकसभा चुनाव में 'आप' को जो जनसमर्थन मिलता हुआ दिखाई दे रहा था वह अब खिसक भी सकता है।

देखें ऐसी पांच गलतियां जो 'आप' ने की-

 कांग्रेस से समर्थन लेना

कांग्रेस से समर्थन लेना

आम आदमी पार्टी ने सरकार बनाने के लिए कांग्रेस से समर्थन लिया, समर्थन देकर कांग्रेस ने अपने खिलाफ होने वाले घोटालों की जांच को तो रोंक ही दिया लेकिन केजरीवाल द्वारा किये गये लोकलुभावन वादों के कारण 'आप' को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया। कांग्रेस ने 'आप' को समर्थन देकर अपनी भ्रष्‍ट छवि से भी निजात पाने की कोशिश की। केजरीवाल अब आंदोलन कर रहे हैं लेकिन अब अगर सरकार असफल रहती है तो उसका ठीकरा सिर्फ केजरीवाल के सिर ही फोड़ा जाएगा।

खुद को सही ठहराना

खुद को सही ठहराना

केजरीवाल ने चुनाव परिणाम आने तक कांग्रेस और भाजपा को बेहद भ्रष्‍ट बताया और सिर्फ खुद को सही साबित करने का प्रयास किया। जनता की नजर में खुद को पाक साफ जताने के लिए अनुभवहीनता का परिचय दिया। टीम के युवा सदस्‍यों को कोई भी प्रशासनिक अनुभव नहीं था।

टीम को प्रशिक्षण नहीं दिया

टीम को प्रशिक्षण नहीं दिया

अरविंद केजरीवाल ने अपनी टीम के युवा सदस्‍यों को प्रशासन के काम संभालने और दिल्‍ली की जनता की समस्‍या दूर करने के लिए तैयार होने का वक्‍त ही नहीं दिया। एक ऐसे राज्‍य में जहां डेढ़ करोड़ लोग रहते हैं वहां अनगिनत समस्‍याएं हैं। ऐसी जगह पर अनुभवहीन लोगों को बड़ी जिम्‍मेदारियां देना केजरीवाल के लिए कोढ़ में खाज का काम किया।

कानून का पालन नहीं किया

कानून का पालन नहीं किया

केजरीवाल ने किसी भी कानून की परवाह नहीं की। उन्‍होने कल आंदोलन करते हुए यह बयान दिया कि अराजकता ही लोकतंत्र हैं। जिससे आने वाले वक्‍त में जनता उनके खिलाफ जा सकती है। देश या राज्‍य की जनता उनसे एक बेहतर नेतृत्‍व की उम्‍मीद कर रही है, वह रोज रोज आंदोलन नहीं देखना चाहती है।

शॉर्टकट लेने का प्रयास

शॉर्टकट लेने का प्रयास

केजरीवाल ने भ्रष्‍ट सिस्‍टम को सुधारने की जग‍ह मीडिया से स्टिंग आपरेशन करने को कहा। रिश्‍वत खोरी को रोंकने के लिए उन्‍होने कोई बड़ी योजना नहीं बनाई उन्‍होने नंबर जरूर जारी किये लेकिन अब यह कोई फर्क पैदा नहीं कर पा रहा है। जनलोकपाल लाने का उनका दावा पहले ही गलत साबित हो चुका है। गौर हो कि चुनाव में आने से पहले केजरीवाल ने 15 दिनों में जनलोकपाल लाने का वादा किया था।

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