दिल्ली में संपत्ति विवाद के मामले में झूठी POCSO शिकायत
दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के गोविंदपुरी इलाके में एक महिला पर अपने पिता के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत झूठी शिकायत दर्ज कराने का आरोप लगाया गया है। गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, पुलिस ने इस आरोप को एक चल रहे पारिवारिक संपत्ति विवाद से जोड़ा है।

यह स्थिति 11 अप्रैल को तब सामने आई जब गोविंदपुरी पुलिस स्टेशन को तुगलकाबाद एक्सटेंशन में एक निवास पर हंगामे के संबंध में तीन पीसीआर कॉल प्राप्त हुईं। महिला, उसके भाई और उनके पिता द्वारा की गई इन कॉलों में घर में घुसने और चोरी की घटनाओं का आरोप लगाया गया था। हालांकि, जांच पर, पुलिस ने निर्धारित किया कि मामला एक सिविल संपत्ति विवाद था।
POCSO अधिनियम के तहत झूठी शिकायत
अगले दिन, महिला अपनी नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म के आरोपों के साथ पुलिस के पास पहुंची। शुरू में, उसने बयान देने में देरी की और बाद में एक लिखित शिकायत सौंपी, लेकिन आगे की पूछताछ के लिए बच्चे को पुलिस स्टेशन लाने से इनकार कर दिया।
जांच और निष्कर्ष
एक महिला जांच अधिकारी सहित एक पुलिस टीम ने बच्चे की जांच के लिए निवास का दौरा किया। बाल कल्याण समिति (CWC) के साथ बातचीत के दौरान, नाबालिग ने अपने दादा द्वारा किसी भी अनुचित व्यवहार से इनकार किया। बच्चे ने यह भी उल्लेख किया कि उसकी मां ने पहले भी इसी तरह के झूठे आरोप लगाए थे।
मेडिकल जांच और CWC का फैसला
बच्चे की एम्स में मेडिकल जांच की गई, जहां डॉक्टरों को मेडिको-लीगल केस रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न का कोई सबूत या इतिहास नहीं मिला। इन निष्कर्षों के आधार पर, कालकाजी में CWC ने शिकायतकर्ता को बच्चे की हिरासत देने से इनकार कर दिया और नाबालिग को सुरक्षात्मक हिरासत में रखा।
कानूनी कार्यवाही
14 अप्रैल को, पुलिस ने महिला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 217 के तहत कानूनी अधिकारियों को गुमराह करने के लिए झूठी जानकारी देने के आरोप में कार्यवाही शुरू की। इस मामले के हिस्से के रूप में आगे की कानूनी कार्रवाई वर्तमान में चल रही है।
With inputs from PTI












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