दिल्ली के हिंसाग्रस्त त्रिलोकपुरी के हिंदू-मुसलमान किन्नरों से कुछ सीखें

नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। यूं तो इनके हिस्से में समाज की तरफ से अपमान और बेइज्जती आरक्षित है,पर इन्होंने राजधानी के बदनाम त्रिलोकपुरी इलाके में जो कुछ किया उससे दंगाइयों को शर्मसार हो जानी चाहिए। हम बात कर रहे हैं किन्नरों की। त्रिलोकपुरी में रहने वाले करीब दो दर्जन किन्नरों को आजकल जब भी वक्त मिलता है, तब ये उन पत्थरों को सड़क से हटाने के काम में जुट जाते हैं, जिन्हें मजहब के ठेकेदारों ने एक-दूसरे के ऊपर लहू बहाने के लिए फेंका था।

सड़कों की करते सफाई

प्रमुख समाज सेवी और शाहदरा केविधायक जितेन्द्र सिंह शंटी ने बताया कि वे जब अपने शहीद भगत सिंह सेवा दल के कार्यकर्ताओं के साथ त्रिलोकपुरी में अमन की अपील के लिए गए तब इन्होंने किन्नरों को वहां की सड़कोंसे पत्थरों और ईंटों की सफाई करते ही देखा। ये नजारा बेहद प्रेरक था। ये सफाई का काम पुलिस के साथ मिलकर कर रहे हैं।

त्रिलोकपुरी में रहने वाली कविता ने बताया कि इन किन्नरों से आम दिनों में लोग बात भी करना पसंद नहीं करते, पर ये त्रिलोकपुरी के हीरो के रूप में उभरे हैं। कविता ने यह भी बताया कि जब हम इनसे सड़कों को साफ करने के पीछे की वजह जानना चाहते हैं तो तो इनका जवाब होता है कि त्रिलोकपुरी के हिन्दू-मुसलमान भाईचारे से रहते रहे हैं। हम भी इनकेसाथ रहते हैं। आजकल भले ही ये सब एक-दूसरे से लड़ रहे हों, पर ये कुल मिलाकर प्रेम से रहते हैं।

trilokpuri, communal violence

त्रिलोकपुरी में करीब दो दर्जन किन्नर रहते हैं। ज्यादातर तो आसपास केइलाकों में किसी परिवार में होने वाली खुशी केमौके पर जाकर अपना हिस्सा मांगते है। हां, कुछेक चारपाई बुनने का काम भी करते हैं। जानकारों ने बताय़ा कि किन्नरों ने त्रिलोकपुरी के ए,बी और दूसरे कई गलियों में जाकर दंगाइयों की करतूतों को एक तरह से साफ करने का काम किया।

शंटी ने बताया कि वे त्रिलोकपुरी के किन्नरो के शानदार काम की जानकारी दिल्ली सरकार के आला अफसरों को भी देंगे ताकि इन्हें सम्मानित किया जा सके। बहरहाल, इन किन्नरों को कोई पुरस्कार नहीं चाहिए, इन्हें तो समाज का सम्मान चाहिये।

वनइंडिया इन किन्नरों को सलाम करता है। आप भी इन्हें कीजिये सलाम और इस खबर को सोशल मीडिया में शेयर कीजिये।

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