Delhi E-Rickshaw Policy: ट्रैफिक जाम से लेकर रोजी-रोटी तक, नई नीति पर सरकार का बड़ा प्लान
Delhi E-Rickshaw Policy: दिल्ली की सड़कों पर दौड़ते ई-रिक्शा अब सिर्फ आखिरी छोर की सवारी नहीं रहे, बल्कि ट्रैफिक जाम और सड़क सुरक्षा की बड़ी वजह भी बनते जा रहे हैं। इसी दोहरी चुनौती से निपटने के लिए दिल्ली सरकार अब ई-रिक्शा को लेकर एक नई और ठोस नीति बनाने की तैयारी में है। सरकार का मकसद साफ है-शहर की सड़कों को जाम से राहत देना और साथ ही हजारों लोगों की आजीविका को भी सुरक्षित रखना।
क्यों ज़रूरी महसूस हुई नई नीति
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, ई-रिक्शा आज दिल्ली में लास्ट माइल कनेक्टिविटी का अहम साधन बन चुके हैं। मेट्रो स्टेशन से कॉलोनी तक, बाजार से घर तक-ई-रिक्शा आम लोगों की जरूरत बन गया है। लेकिन इनकी बेतरतीब संख्या, धीमी रफ्तार और तय नियमों की कमी ने ट्रैफिक व्यवस्था को बिगाड़ दिया है। इसी वजह से अब इन्हें पूरी तरह रेगुलेट करने की जरूरत महसूस की जा रही है।

क्या-क्या शामिल होगा नई पॉलिसी में?
परिवहन विभाग जल्द ही इस मुद्दे पर औपचारिक बैठक करने वाला है। इस बैठक में ई-रिक्शा के रजिस्ट्रेशन, चार्जिंग स्टेशन जैसी बुनियादी सुविधाएं, तय रूट, स्टैंड और ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसे अहम बिंदुओं पर चर्चा होगी। सरकार चाहती है कि ई-रिक्शा शहर के लिए बोझ नहीं, बल्कि व्यवस्थित और सुरक्षित परिवहन विकल्प बनें।
आंकड़े क्या कहते हैं?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2026 तक दिल्ली में 2 लाख 4 हजार 131 ई-रिक्शा वाहन पोर्टल पर रजिस्टर्ड हैं। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि असल संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। सबसे ज्यादा ई-रिक्शा रोहिणी इलाके में हैं, जहां इनकी संख्या 46 हजार से ज्यादा है। इसके बाद वजीरपुर, लोनी रोड और जनकपुरी जैसे इलाके आते हैं। वहीं IP एस्टेट में सबसे कम सिर्फ 94 ई-रिक्शा दर्ज हैं।
हाई कोर्ट की सख्ती भी बनी वजह
पिछले महीने दिल्ली हाई कोर्ट ने भी ई-रिक्शा के नियमन को लेकर सरकार और ट्रैफिक पुलिस से जवाब मांगा था। यह मामला उस दर्दनाक हादसे से जुड़ा है, जिसमें एक 8 साल की बच्ची की स्कूल जाते वक्त ई-रिक्शा हादसे में मौत हो गई थी। अदालत ने साफ कहा है कि सड़क सुरक्षा से कोई समझौता नहीं हो सकता।
अनरजिस्टर्ड ई-रिक्शा को भी मौका
सरकार इस बात को लेकर भी संवेदनशील है कि अचानक सख्ती से हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर असर न पड़े। इसलिए अनरजिस्टर्ड ई-रिक्शा चालकों को एक तय समय दिया जा सकता है, ताकि वे अपने वाहन रजिस्टर करा सकें और नियमों के दायरे में आ सकें।
पहले से लागू हैं पाबंदियां?
गौरतलब है कि 2014 में भी परिवहन विभाग ने ई-रिक्शा को लेकर नोटिफिकेशन जारी किया था, जिसमें दिल्ली की 236 सड़कों पर इनके चलने और खड़े होने पर रोक लगाई गई थी। लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर सीमित ही रहा। अब देखना होगा कि नई नीति दिल्ली की सड़कों को कितना राहत देती है और ई-रिक्शा चालकों के भविष्य को कितना सुरक्षित बना पाती है।
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