केजरीवाल का हथियार अब उनपर ही पड़ रहा है भारी

arvind kejriwal
नयी दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत अनशन और धरना प्रदर्शनों से की। अन्ना के अनशन से जन्में केजरीवाल ने दिल्ली में बढ़े हुए बिजली के दामों को लेकर धरा प्रदर्शन कर दिल्ली की पिछली शीला दीक्षित सरकार के नाम में दम कर दिया और अपने इसी हथियार से उन्होंने शीला दीक्षित की कुर्सी तक छीन ली। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री बनने के बाद भी दिल्ली पुलिस के तीन एसएचओ के निलंबिन को लेकर केजरीवाल ने अनशन किया, लेकिन उनका ये हथियार अब उनके लिए ही भारी पड़ने लगा है।

अब दिल्ली के लोगों ने केजरीवाल को उनकी ही भाषा में जवाब देना शुरु कर दिया है। चुनावी घोषणापत्र में आम आदमी पार्टी ने सभी अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने का वादा किया था, लेकिन अबतक इस पर कोई पहल नहीं हुई। ऐसे में अपनी मांग को पूरा कराने के मकसद से डीटीसी के अस्थायी कर्मचारी मिलेनियम बस डिपो के बाहर धरना देने बैठ गए है। डीटीसी बस के ये कर्माचरी केजरीवाल के हथियार से उनपर ही हमला करने लगे है। धरने पर बैठे कर्मचारियों को मनाने गए मुख्यमंत्री को खाली हाथ लौटना पड़ा।

धरने पर बैठे हड़ताली ड्राइवर कंडक्टरों की मांग है कि केजरीवाल सरकार अपने वादें को पूरा करे। ठेके पर काम करने वाले कर्मचारी चाहते हैं कि चुनावी वादे पर सरकार अमल करे और उन्हें स्थायी किया जाए। जब मुख्यमंत्री अपने मंत्रियों के साथ उनसे मिलने पहुंचे तो उन्हें कर्मचारियों के बहस का सामना करना पड़ा। सीएम ने कर्मचारियों में मौखिक से लेकर लिखित आश्वासन दे दिया गया, लेकिन हड़ताली कर्मचारियों के नेता संतुष्ट नहीं हुए। बरसों से ठेके पर काम करने वालों को अब चार-पांच महीने का इंतजार भी लंबा लगने लगा है।

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