केजरीवाल के जनलोकपाल बिल पर आज लगेगी मोहर

रामलीला मैदान पर बिल को लेकर विधानसभा सत्र आयोजित करने के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के एक सूत्र का कहना है बिल का ड्राफ्ट तैयार हो जाने और एक बार कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद हम इस पर विचार करेंगे। जनलोकपाल बिल काफी हद तक उत्तराखंड लोकायुक्त बिल पर आधारित है, हालांकि यह कुछ मामलों जैसे मुख्यमंत्री को जांच के दायरे में लाये जाने के मुद्दे पर अलग है।
गौर हो कि केजरीवाल सरकार ने एक महीने का वक्त पूरा कर लिया है, कल हुई मीटिंग में केजरीवाल ने इस दौरान किये गये कार्यों पर चर्चा की। जनलोकपाल बिल का ड्राफ्ट तैयार करने की जिम्मेदारी मुख्य सचिव, शहरी विकास सचिव, कानून और वित्त विभाग और अधिवक्ता राहुल मेहरा को दी गई थी। चुनाव के घोषणा पत्र में केजरीवाल ने वादा किया था कि वह ऐसा भ्रष्टाचार विरोधी बिल लाएंगे जिसके अंतर्गत मुख्यमंत्री से लेकर विधायक तक सब आएंगे।
'आप' की वेबसाइट के मुताबिक जनलोकपाल बिल के अंतर्गत भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की जाएगी और छह महीने में कार्यवाई की जाएगी। अपराधी पाये जाने पर आरोपी की संम्पत्ति सीज कर दी जाएगी और उसे एक साल से लेकर उम्र कैद तक की सजा दी जा सकती है। बिल के अंतर्गत किसी भी अधिकारी की यह जिम्मेदारी होगी कि वह समयसीमा में ही अपना काम पूरा करे, अगर वह ऐसा नहीं करता है तो जुर्माना भी देना होगा।












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