दिल्ली विधानसभा में घटेंगे मुसलमान एमएलए
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) दिल्ली में मुसलमान कल भाजपा के हक में वोट देंगे या आप के हक में झाड़ू चलाएँगे, इस मसले पर आज राजधानी के प्रेस क्लब में पत्रकारों के बीच लगातार अखंड बहस जारी है। बहस कभी-कभी तेज गर्म हो जाती है।

पहले पांच थे
पिछले चुनाव में कांग्रेस के चार और जनता दल का मुसलमान उम्मीदवार जीता था। जनता दल उम्मीदवार अब कांग्रेस में हैं। हम बात कर रहे शोएब इकबाल की। इनके अलावा मतीन हमद, मोहम्मद आसिफ, हारून युनूस और हसन अहमद भी जीते थे उन क्षेत्रों से जहां पर मुसलमानों की आबादी खास है।
सारे नहीं विजयी होंगे
पर जानकार कह रहे हैं कि इस बार कांग्रेस के पिछले चुनाव में जीते सारे उम्मीदवार नहीं जीत पाएंगे।सबसे ज्यादा खतरा शोएब इकबाल को है। उन्हें मटिया महल सीट पर भाजपा के अंजुमन देहलवी कड़ा मुकाबला दे रहे हैं। इधर इस बार कोई चौकाने वाला फैसला आ सकता है।
मोदी के साथ मुसलमान
अब सवाल यह है कि क्या दिल्ली के मुस्लिम मतदाता हिंदूवादी छवि वाले पीएम मोदी का साथ देंगे? दिल्ली में कल वोटिंग होगी और मतदान होगा 10 फरवरी को। चुनाव के ऐलान से पहले ही पीएम नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के मतदाताओं को रिझाने के लिए दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली भी की थी।
आप के साथ मुसलमान
वरिष्ठ पत्रकार अजीत गांधी कहते हैं कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुसलमान कुछ हदतक तो मोदी को वोट देंगे। उन्हें मोदी का विकास मॉडल और एजेंडा मुसलमानों को पसंद आ रहा है। मोदी के प्रति मुसलमानों की धारणा बदल रही है। पर वे कुल मिलाकर आप के साथहैं। कुछ सीटों पर मुसलमान कांग्रेस के हक में भी खड़े हो सकते हैं।
मुसलमान मोदी के साथ
राजधानी के तारीखी एंग्लो अराबिक स्कूल में पढ़ा रहे मकसूद अहमद ने कहा कि प्रगतिशील मुस्लिम दिल्ली में नरेंद्र मोदी को समर्थन देने को लेकर तैयार है। हालांकि ये भी सच है कि मुस्लिम समुदाय बीजेपी सांसद साक्षी महाराज और साध्वी निरंजन ज्योति के दिए बयानों के कारण भाजपा से दूर हुआ।
जानकारों का कहना है कि अटल बिहारी वाजपेयी कुछ हद तक मुसलमानों का दिल जीतने में कामयाब रहे थे। पर अब मोदी को लेकर मुसलमानों का रुख बदल रहा है। एक बात तय है कि इस बार दिल्ली विधानसभा में कम मुसलमान विधायक पहुंचेंगे।












Click it and Unblock the Notifications