दिल्‍ली विधानसभा चुनाव से पहले एनजीओ का खुलासा: वोटर लिस्‍ट से 'गायब' हो गये 42 लाख वोटर

नयी दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। दिल्‍ली की दंगल कौन जीतेगा इसका फैसला होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं। विधानसभा चुनाव से महज कुछ दिनों पहले एक एनजीओ ने अपने सर्वेक्षण में जो खुलासा किया है वो हैरान करने वाला है। एनजीओ ने अपने सर्वेक्षण रिपोर्ट में दावा किया है कि दिल्ली की वोटर लिस्‍ट में गंभीर खामियां हैं और कुल 1.33 करोड़ मतदाताओं में से कम से कम 22 फीसदी मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आवश्यकता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि ये 22 फीसदी मतदाता अपने विधानसभा क्षेत्र से गायब हैं।

22 percent voters names in Delhi need deletion: NGO

सामाजिक संस्था जनाग्रह सेंटर फॉर सिटीजनशिप एंड डेमोक्रेसी (जेसीसीडी) ने अपने सर्वे के आधार पर दावा किया है कि करीब 42.5 लाख मतदाताओं के नामों को वोटर लिस्‍ट से हटाने की जरूरत है क्‍योंकि ये वोटर अपने पते पर नहीं रहते या उनकी मौत हो चुकी है या फिर वो जेल में बंद हैं। इस बारे में संस्था ने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाने की बात कही है। गौरतलब है कि इससे पहले इसी महीने दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी ने दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष माना था कि आगामी चुनावों के लिए उसकी ओर से जारी मतदाता सूची में गलतियां हैं।

दिल्‍ली प्रेस क्‍लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में एनजीओ के संयोजक श्रीकांत विश्‍वनाथ ने बताया कि उनकी संस्‍था ने दिल्‍ली के आठ विधानसभा क्षेत्रों में 3210 मतदाताओं पर सर्वे किया। इसमें 22 फीसद मतदाताओं के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। संभवत: ये लोग वहां से कहीं और चले गए या उनकी मौत हो चुकी है। इतना ही नहीं उन्‍होंने कहा कि एक फीसदी मतदाताओं के नाम दो या फिर तीन जगहों पर वोटर लिस्‍ट में दर्ज है।

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