कांग्रेस मध्यप्रदेश में बसपा विधायकों को कैबिनेट में नहीं करेगी शामिल, महागठबंधन में जगह ना मिलने से नाराज
नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन में जगह ना मिलने से कांग्रेस निराश है। कांग्रेस को उम्मीद था कि मायावती और अखिलेश यादव उनकी पार्टी को गठबंधन में शामिल करेंगे।हालांकि सपा-बसपा ने कांग्रेस के खिलाफ रायबरेली और अमेठी में उम्मीदवार ना घोषित करने का ऐलान किया था. मध्यप्रदेश में भी इसका असर दिख रहा है. एमपी के मुख्यमंत्री कमलनाथ के खास सहयोगी ने द प्रिंट को बताया कि अब कमलनाथ का अब कैबिनेट में किसी बसपा विधायक को शामिल करने का प्लान नहीं है.

कमलनाथ ने एमपी में कांग्रेस सरकार बनने के बाद सीएम पद की बागडोर संभाली थी। कमलानाथ ने इसके बाद 28 विधायकों को 28 विधायकों को कैबिनेट में जगह दी थी, इसमें दो महिलाओं और एक निर्दलीय विधायक को भी शामिल किया था। कमलनाथ के नजदीकी सहयोगी का कहना है कि अब कैबिनेट विस्तार की कोई गुंजाइश नहीं है। इससे पहले दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व की ये इच्छा थी कि बसपा की कैबिनेट पद की मांग को देखते हुए उसके दो विधायकों में से एक को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। लेकिन अब पार्टी का एक तबका चाहता है कि पार्टी को चार निर्दलीय विधायकों पर ध्यान देना चाहिए जो सभी पार्टियों से बागी हैं।
गौरतलब है कि एमपी की 230 विधानसभा सीटों में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाए थे। कांग्रेस को कुल 114 सीटें मिली थीं और वो सूबे में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, इसके बावजूद पार्टी बहुमत के आंकड़े से दो सीट पीछे रह गई थी, जो कि 116 है। कांग्रेस को इसके बाद बसपा के दो विधायकों, सपा के एक विधायक और चार निर्दलीय विधायकों ने समर्थन दिया था, जिससे बाद कांग्रेस ने 121 विधायकों का समर्थन जुटाकर एमपी में 15 साल का वनवास खत्म करते हुए अपनी सरकार बनाई।

फ्लोर पर टेस्ट से पहले बसपा के दोनों विधायकों संजीव सिंह कुशवाहा और रमाबाई ने कमलनाथ के घर में जाकर उनसे मुलाकात की। वहां रिपोर्टरों से बातचीत में रमाबाई ने कहा कि मायावती(बहन जी) ने हमसे कांग्रेस विधायकोंकी मीटिंग में शामिल ना होने को कहा था पर भोज में शामिल होने को कहा था। मैंने संजीव सिंह कुशवाहा के लिए कैबिनेट और खुद के लिए राज्यमंत्री पद की मांग की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वो इसका ध्यान रखेंगे।
इस पर कांग्रेस के एक सीनियर नेता ने कहा कि बसपा विधायकों ने उस समय ऐसी कोई डिमांड नहीं रखी थी। अब वो ऐसी मांग कर रहे हैं, लेकिन जब उन्होंने हमें समर्थन का प्रस्ताव दिया था तब ऐसी कोई मांग नहीं रखी थी। देश की सबसे पुरानी पार्टी मायवाती से इस बात से नाराज है कि उन्हें महागठबंधन में शामिल नहीं किया गया। एसपी-बीसपी ने
सूबे में 38-38 सीटों पर लड़ने का फैसला किया है।
कांग्रेस की नाराजगी की वजह मायावती का कांग्रेस पर लगातार हमले करना भी है। उन्होंने भाजपा और कांग्रेस की तुलना करते हुए आरोप लगाया कि जैसे पीएम मोदी के समय राफेल घोटाला हुआ है, वैसे ही 1980 में राजीव गांधी के पीएम रहते हुए बोर्फोस घोटाला हुआ था।
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