नेपाल के पहाड़ों की एक तिहाई बर्फ खत्म: संयुक्त राष्ट्र

यूएन महासचिव गुटेरेश ने कहा है कि यह बर्फ करीब 30 सालों में खत्म हुई. सोमवार को माउंट एवरेस्ट के पास एक इलाके सोलुखुंबु के दौरे के बाद उन्होंने एक वीडियो संदेश के जरिए कहा कि नेपाल के ग्लेशियर पिछले दशक में उससे पहले के दशक के मुकाबले 65 प्रतिशत ज्यादा तेजी से पिघले.
उन्होंने आगे कहा, "मैं आज यहां आया हूं ताकि दुनिया की छत से चिल्ला कर कह सकूं: यह पागलपन बंद कीजिए." "जीवाश्म ईंधन युग" के अंत की मांग करते हुए उन्होंने चेतावनी भी दी कि ग्लेशियरों के पिघलने से नदियों और तालाबों में उफान आ जाएगा, पूरे के पूरे समुदाय बह जाएंगे हुए और समुद्रों के जलस्तर में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी होगी.
खतरे में ग्लेशियर
गुटेरेश नेपाल की चार दिवसीय यात्रा पर हैं. उन्होंने देशों से वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी को भी 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने की अपील की ताकि "जलवायु उथल पुथल के सबसे बुरे हालात" से बचा जा सके.
जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले 100 सालों में धरती के तापमान में औसत 0.74 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन हिमालय के इलाकों में वैश्विक औसत से ज्यादा तेजी से तापमान बढ़ा है.
जून, 2023 में छपी एक रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने कहा था कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से इस शताब्दी के अंत तक हिंदू कुश-हिमालय इलाके के ग्लेशियरों का फैलाव 75 प्रतिशत कम हो सकता है.
इससे इस इलाके में रहने वाले 24 करोड़ लोगों के लिए खतरनाक बाढ़ आ सकती है और उनके लिए पानी की कमी भी हो सकती है. एवरेस्ट से लौटने वाले पर्वतारोहियों का कहना है कि पहाड़ और सूखा और स्लेटी होता जा रहा है.
सीके/एए (रॉयटर्स)
Source: DW












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