MP News: सट्टा माफिया की दहशत, पत्रकार ब्रजेश दीक्षित पर दो बार जानलेवा हमला, गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती
MP News: मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में एक पत्रकार पर सट्टा माफिया द्वारा किए गए दोहरे हमले ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी है।
करेली थाना क्षेत्र के आमगांव बड़ा में शुक्रवार रात पहले मारपीट और फिर डंडों-तलवारों से जानलेवा हमला कर पत्रकार ब्रजेश दीक्षित को गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। सट्टा कारोबार के खिलाफ लगातार रिपोर्टिंग और प्रशासन से कार्रवाई की मांग ब्रजेश को भारी पड़ गई।

हमले में गंभीर रूप से घायल ब्रजेश का इलाज नरसिंहपुर जिला अस्पताल में चल रहा है। पुलिस ने इस मामले में छह सट्टा माफियाओं के खिलाफ नामजद मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल सभी आरोपी फरार हैं।
सट्टे की रिपोर्टिंग बना वजह, आमगांव बड़ा में माफिया ने पीटा
करेली थाना प्रभारी संजय राठौर ने बताया कि ब्रजेश दीक्षित लंबे समय से करेली और आसपास के इलाकों में चल रहे सट्टे के अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। शुक्रवार रात करीब 8 बजे वे आमगांव बड़ा में थे, तभी पहले से घात लगाए बैठे सट्टा माफिया के गुंडों ने उन पर हमला किया।
हमलावरों ने उन्हें धमकाते हुए बेरहमी से पीटा और चेतावनी दी कि वे अगर सट्टे के खिलाफ रिपोर्टिंग बंद नहीं करेंगे, तो इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा। इस हमले के बाद ब्रजेश हिम्मत दिखाते हुए सीधे आमगांव पुलिस चौकी पहुंचे और हमलावरों की शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के बाद घर लौटते वक्त तलवार-डंडों से हमला
रात करीब 11 बजे, जब ब्रजेश अपने घर लौट रहे थे, तभी करेली थाना क्षेत्र में सट्टा माफिया ने दूसरी बार हमला किया। इस बार हमलावर तलवार और डंडों से लैस थे। उन्होंने ब्रजेश पर जानलेवा हमला करते हुए उनके सिर, हाथ और शरीर पर कई गंभीर चोटें पहुंचाईं।
परिजन उन्हें गंभीर हालत में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने कहा कि ब्रजेश की हालत नाजुक लेकिन स्थिर है। सिर में गहरी चोट और शरीर पर कई गंभीर घाव हैं। अस्पताल प्रशासन ने अगले 24 घंटे को बेहद अहम बताया है।
छह आरोपियों पर केस दर्ज, गिरफ्तारी की कोशिशें तेज
पुलिस ने इस हमले को गंभीरता से लेते हुए राजेंद्र सिसोदिया उर्फ बड़े, अशोक सिसोदिया उर्फ छोटा मुन्ना, राजा सिसोदिया, अन्नू सिसोदिया, गुड्डू सिसोदिया, और मोंटी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 126(2), 296, 115(2), 351(2) और 3(5) वीएनएस के तहत केस दर्ज किया गया है। नरसिंहपुर कोतवाली पुलिस और करेली थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। कुछ ठिकानों पर छापेमारी भी की गई है।
ब्रजेश दीक्षित, एक साहसी पत्रकार
ब्रजेश दीक्षित उन पत्रकारों में से हैं, जो स्थानीय मुद्दों, अवैध गतिविधियों और जनहित के मामलों को बेखौफ तरीके से उठाते रहे हैं। खासकर करेली क्षेत्र में सट्टा कारोबार के खिलाफ उनकी रिपोर्टिंग ने कई माफिया चेहरों को बेनकाब किया था। उनकी रिपोर्टिंग से स्थानीय सट्टा माफिया तिलमिलाया हुआ था। स्थानीय लोगों का कहना है कि ब्रजेश ने कई बार पुलिस और प्रशासन को ज्ञापन देकर सट्टे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। उन्हीं की वजह से कई सट्टा केंद्रों पर छापेमारी भी हुई थी।
पत्रकार संगठनों और समाज में आक्रोश
हमले की खबर फैलते ही नरसिंहपुर और आसपास के इलाकों में पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम जनता में भारी आक्रोश देखने को मिला। पत्रकार संगठनों ने इसे पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करार देते हुए दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है। एक स्थानीय पत्रकार ने कहा, "अगर सच्चाई लिखने और माफिया के खिलाफ बोलने पर पत्रकार पर हमला होता है, तो ये लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत हैं। हम सरकार और प्रशासन से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं।"
पुलिस की कार्रवाई और संभावित राजनीतिक संरक्षण की जांच
नरसिंहपुर एसपी ने स्पष्ट किया है कि सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। उन्होंने पत्रकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या सट्टा माफिया को किसी राजनीतिक या प्रशासनिक व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त था। सूत्रों का कहना है कि करेली और आसपास के इलाकों में सट्टे का कारोबार लंबे समय से फल-फूल रहा है, और प्रशासन की मिलीभगत की भी जांच हो रही है।
पत्रकारिता के विरुद्ध हिंसा का यह मामला समाज को सोचने पर मजबूर करता है
ब्रजेश दीक्षित पर हुआ यह दोहरा हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि सच कहने की आजादी, निष्पक्ष पत्रकारिता और कानून व्यवस्था पर भी सीधा हमला है। यदि सट्टा माफिया और अपराधी तंत्र इस हद तक बेखौफ होकर पत्रकारों को निशाना बना सकते हैं, तो सवाल उठता है कि आम आदमी कितना सुरक्षित है?
इस मामले में प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और दोषियों की गिरफ्तारी से ही यह साबित होगा कि कानून का राज अब भी कायम है। वहीं, समाज को भी अब जागना होगा और ऐसे पत्रकारों के साथ खड़ा होना होगा, जो सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए लड़ते हैं।
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