संविधान से ऊपर नहीं हैं मोदी के मंत्री: सुप्रीम कोर्ट

गौर हो कि आनंदीबेन पटेल ने एक निजी कंपनी को भूमि आवंटित करने में मनमानी की थी, जिसके लिए उन्होने वरिष्ठ अधिकारियों की भी बात नहीं सुनी। न्यायमूर्ति एच.एल. गोखले और न्यायमूर्ति जे. चेलामेश्वर की पीठ ने अपने आदेश में कहा, कोई भी संविधान से ऊपर नहीं है, चाहे वो किसी भी पद पर बैठा हो।
न्यायालय ने अपने आदेश में आगे कहा, "सिर्फ इस पूर्वग्रह के आधार पर कि यह औद्योगिक विकास के हित में होगा, भुज के कलेक्टर को मनमाने तरीके से काम करने के लिए बाध्य करना संविधान द्वारा बनाए गए कानून एवं जनादेश का उल्लंघन साबित होता है।"
यह ध्यान देने योग्य है कि गुजरात सरकार निवेश को बढ़ावा देती है, जिससे अधिक से अधिक प्राइवेट कंपनियां वहां आकर लोगों को रोजगार दे।












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