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कोरोना में मंदिर बंद हुए तो भी चप्पल चोरों ने नहीं छोड़ा धंधा, सिर्फ ये रणनीति बदली

मुंबई, 4 जुलाई: मुंबई में कोरोना की वजह से पाबंदियों के दौरान भी धार्मिक स्थलों से चप्पल-जूते चुराने वाले गिरोहों का धंधा बंद नहीं हुआ है। उन्होंने सिर्फ अपनी रणनीति बदली है और चोरी से होने वाली उनकी कमाई जारी है। गौरतलब है कि ऐसे चोरी के जूत-चप्पलों के लिए साप्ताहिक चोर बाजार बहुत बड़े मार्केट हैं, जहां सारा माल खपते देर नहीं लगती। मुंबई में धार्मिक स्थलों, खासकर मंदिरों के बाहर श्रद्धालुओं के जूते-चप्पलों को टारगेट करने वाले गिरोह, अब वहां की ऊंची आवासीय बिल्डिंगों और अपार्टमेंट को टारगेट कर रहे हैं। नई रणनीति में वह सिर्फ महंगे फुटवियर पर ही हाथ साफ कर रहे हैं। पुलिस औपचारिक शिकायत का इंतजार कर रही है और लोगों ने अपने जूते-चप्पलों की हिफाजत के लिए अपनी आदतों में सुधार करना शुरू कर दिया है।

इमारतों की शू रैक से उड़ा रहे हैं जूते-चप्पल

इमारतों की शू रैक से उड़ा रहे हैं जूते-चप्पल

मुंबई में मंदिरों के बाहर से जूते-चप्पल उठाने वाले गिरोहों ने अब हाउसिंग सोसाइटी और बड़ी इमारतों को टारगेट करना शुरू कर दिया है। साउथ मुंबई के गिरगांव इलाके की कई सारे सोसाइटी के लोगों के तो अब ऐसे चप्पल चोरों की वजह से कान खड़े हो गए हैं और उन्हें अपने नए और महंगे जूते-चप्पलों की हिफाजत के लिए अपनी आदत में तब्दीली लानी पड़ रही है। चप्पल चोरों की रणनीति की किसी को भनक भी नहीं लगती, यदि हाल ही में गिरगांव की एक ऊंची इमारत से अचानक दर्जनों जूते-चप्पल गायब नहीं हो जाते। चोर ने सारे माल पर घंटेभर से भी कम समय में हाथ साफ कर लिया। गिरगांव के पूर्वा हाइट्स कोऑपरेटिव सोसाइटी के प्रेसिडेंट हिमांशु देसाई ने मुंबई मिरर को बताया कि,'एक अनजान शख्स लिफ्ट का इस्तेमाल कर सिर्फ खासकर नए जूते और और दूसरे फुटवियर उठाने के लिए घुस आया था, जो कि अपार्टमेंट के बाहर या दरवाजों पर बनी शू रैक्स में रखे थे। ' (पहली तस्वीर सांकेतिक, दूसरी- सीसीटीवी की तस्वीर-सौजन्य-मुंबई मिरर)

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    सीसीटीवी में पकड़ा गया जूता चोर

    सीसीटीवी में पकड़ा गया जूता चोर

    जब से यह घटना सामने आई है, स्थानीय लोगों ने सावधानी के तौर पर पहले तो यह उपाय अपनाया है कि अपने जूते-चप्पलों और दूसरी चीजों को घरों के भीतर रखना शुरू कर दिया है। वह इन घटनाओं की सूचना स्थानीय पुलिस वालों को भी देने की सोच रहे हैं। जूते-चप्पल अपार्टमेंट के बाहर से गायब होने की इन घटनाओं पर किसी का शायद ध्यान भी नहीं जाता, अगर बिल्डिंग में लगे सीसीटी कैमरों में चोर की चोरी नहीं पकड़ी जाती। चोर रात में 8 बजे के बाद बहुत ही शातिराना अंदाज में बिल्डिंग में दाखिल हुआ और चुनिंदा जूते-चप्पों को ही अपने बैग में भरकर ले गया। उसने ऐसे समय को चुना, जब लोग घरों में टीवी देखने या डिनर करने में मशगूल होते हैं और अपार्टमेंट के बाहर आवाजाही बहुत ही कम रहती है। (ऊपर सीसीटीवी की तस्वीर)

    मंदिरों में बंध हुआ धंधा तो बदल ली रणनीति

    मंदिरों में बंध हुआ धंधा तो बदल ली रणनीति

    ऐसी घटानाएं सिर्फ एक सोसाइटी में सामने नहीं आई है। एक स्थानीय निवासी धीरज जैन ने बताया पूर्वा बिल्डिंग से कुछ ही किलोमीटर दूर ओरिन टावर में भी दो हफ्ते पहले ऐसी ही घटना सामने आई थी। उनके मुताबिक 'करीब एक दर्जन जोड़े जूते चोरी हो गए।' उनका कहना है कि, 'हमें बाद में पता चला कि हमारी सोसाइटी के लोगों के साथ ही ऐसा नहीं हुआ है। इस इलाकें में कई और बिल्डिगों में भी चोरी की ऐसी ही वारदातें हुई हैं। चोर हाउसिंग सोसायटियों को शायद इसलिए निशाना बना रहे हैं कि पहले वे और उनके रीसेलर जूते-चप्पल धार्मिक स्थानों से चुराते थे, लेकिन अब उन्हें वैकल्पिक जगहों की तलाश करनी पड़ रही है।' री-सेलरों का काम है कि वह चुराए गए जूतों को ऐसा बना देते हैं, जिससे खरीदने वालों को उसके बारे में जरा भी शक न होने पाए।

    चोर बाजारों में बिकते हैं चोरी के जूते-चप्पल

    चोर बाजारों में बिकते हैं चोरी के जूते-चप्पल

    ये सारे चोरी के जूते-चप्पल हर शुक्रवार को सबरे-सबेरे चोर बाजारों तक पहुंच जाते हैं, जहां मेमोरी कार्ड से लेकर जैकेट और घर के बाकी सामानों से लेकर फुटवियर तक सस्ते दामों में बिक जाते हैं। वीपी रोड पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर हेमंत बवधनकर ने कहा है, 'अभी तक इस तरह की किसी भी घटना की हमें रेसिडेंस, सोसाइटी या बिल्डिंग जो कि हमारे क्षेत्र में हैं उनसे कोई शिकायत नहीं मिली है। कोई औपचारिक शिकायत दर्ज कराएगी तो उस सूचना के आधार पर हम कार्रवाई करेंगे।' (आखिरी दोनों तस्वीरें-सांकेतिक)

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