350 साल पुराने Babulnath Shivling में इस वजह से पड़ रहीं दरारें, IIT बॉम्बे ने बताई ये बड़ी वजह

Babulnath Shivling Cracking: 350 साल पुराने बाबुल नाथ मंदिर के शिवलिंग में दरारें आने लगी हैं। आईआईटी-बॉम्बे के विशेषज्ञों इसके पीछे की चौंकाने वाली बताई। उन्होंने बताया कि मिलावटी दूध, गुलाल की वजह से यह दरारें आई है।

Babulnath Shivling Cracking

Babulnath Shivling Cracking: बाबुल नाथ मंदिर दक्षिण मुंबई के मालाबार हिल की एक छोटी पहाड़ी पर स्थिति है और काफी प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर के शिवलिंग को लेकर अब बड़ी जानकारी सामने आई है। दरअसल, बाबुल नाथ मंदिर के शिवलिंग में दरारें आने लगी है, जिसकी खबर से मंदिर प्रशासन समेत हर कोई हैरान हो गया। जिला प्रशासन ने शिवलिंग में दरारें आने के पीछे की वजह पता लगाने के लिए आईआईटी-बॉम्बे के विशेषज्ञों से मदद मांगी थी।

12वीं सदी में स्थापित हुए बाबुल नाथ मंदिर के शिवलिंग की जांच कर आईआईटी-बॉम्बे के विशेषज्ञों ने अपनी जांच रिपोर्ट दे दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, शिवलिंग में दरार की वजह उसका पुराना होना नहीं बताया गया है। आईआईटी बॉम्बे की रिपोर्ट के मुताबिक, शिवलिंग को मिलावटी अबीर, गुलाल, भस्म, कुमकुम चंदन, दूध चढ़ावे के कारण नुकसान पहुंच रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दूध और पानी के उपयोग को प्रतिबिंधित करने की सिफारिश की गई है।

इस रिपोर्ट्स के बाद बाबुल नाथ मंदिर परिसर में दूध, गंगाजल, शहद, गन्ने का रस चढ़ाने के साथ-साथ बेलपत्र, फूल, मिठाई और फल चढ़ाने पर भी रोक लगाने वाला बोर्ड लगा दिया गया है। आईआईटी बॉम्बे ने 23 मार्च को जो अपनी रिपोर्ट सौंपी है उसमें शिवलिंग के संरक्षण और दीर्घायु के लिए कुछ सुझाव दिए गए हैं। मुख्य रूप से, यह सिफारिश की गई है कि मूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिलावटी और केमिकल तत्वों वाले सभी प्रसादों को बंद कर दिया जाना चाहिए।

भक्तों को केवल जलाभिषेक की अनुमति
350 साल पुराने बाबुल नाथ मंदिर के शिवलिंग में दरारें दिखने और आईआईटी-बॉम्बे की रिपोर्ट् के बाद मंदिर प्रशासन ने दूध, शहद, अबीर, गुलाल, चंदन, भस्म, बिल्व पत्र, कनेर के फूल, धतूरा आदि चढ़ाए जाने पर प्रतिबंध लगा दिया हैं। भक्त अब शिवलिंग पर केवल जल अभिषेक ही कर सकेंगे। मंदिर प्रशासन ने केवल जल अभिषेक की अनुमति दी है।

केमिकल युक्त चीजों से शिवलिंग को हो रहा नुकसान
भगवान शिव के ऊपर अभिषेक में दूध, जल, शहद, दही, अबीर, भस्म, गुलाल, चंदन, फूल, धतूरा, बेल पत्र और अन्य प्रसाद चढ़ाने की प्रथा है। बाजार में उपलब्ध चंदन, अबीर, गुलाल, भस्म में मिलावट और केमिकल युक्त आ रहे है। इन मिलावटी और केमिकल युक्त वस्तुओं से शिवलिंग को क्षति पहुंच रही है। शिवलिंग पर चढ़ाया जाने वाला कुमकुम और भस्म भी रसायन युक्त आ रही है। इन केमिकल युक्त वस्तुओं से शिवलिंग को क्षति पहुंच रही है।

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    सोलंकी राजवंश के समय का है बाबुल नाथ मंदिर
    मंदिर सोलंकी राजवंश के समय का है। ऐसा पहली बार हुआ है, जब शिवलिंग में दरारें आई हो। शिवलिंग में दरारें आने की जानकारी मंदिर के पुजारियों को करीब आठ से 10 महीने पहले हुई थी। हालांकि, मंदिर के ट्रस्टियों का दावा है कि शिवलिंग खंडित नहीं हुआ है। वहीं, आईआईटी-बॉम्बे की रिपोर्ट में कहा गया है कि चूंकि भगवान शिव और भगवान गणेश की मूर्तियां ग्रेनाइट और संगमरमर से बनी हैं। इसलिए जो प्रसाद प्रकृति में अम्लीय और नमकीन हैं, जिसमें दरारें शामिल हैं और इसका फैलाव जो कई गीले और सुखाने वाले दरार के कारण भी बढ़ जाता है।

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