सावधान मुंबई! मॉनसून हुआ लेट लेकिन मलेरिया नहीं

Mumbai
मुंबई। सरकार चाहे कितना ही स्वच्छ वातावरण तैयार करने के प्रयासों का दावा करे लेकिन उसकी करनी व कथनी में साफ फर्क नजर आता है। इसका एक उदाहरण मानसून से पहले ही देखने को मिल गया है। मानसून से पहले ही महाराष्ट्र में मलेरिया के प्रकोप ने हाल खराब कर दिए हैं।

एक दैनिक अखबार से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से मई तक राज्य में दस हजार से ज्यादा मलेरिया पीड़ितों के मामले सामने आए हैं जबकि सात पीड़ितों की मौत भी हो गई। गौरतलब है कि देश के ज्यादातर राज्यों में सरकारी अस्पतालों की हालत बद से बद्तर है। चारो तरफ गंदगी फैली होती है जहां मरीज की हालत में कैसे सुधार होगा यह बयान करने की जरूरत नहीं है।

एमसीडी की माने तो मुंबई के बाद इस वर्ष सबसे ज्यादा मलेरिया के मामले.. थाने, कल्यान, भिवंडी, नवी मुंबई, मीरा-भैंडर, वसाई विरार, नासिक, उल्हास नगर, और पिंपड़ी-छिंछवाड़ में आए हैं। इन इलाकों में अभी तक एक हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं। दरअसल इस बार मानसून पहले की तुलना में थोड़ा देर से आने का अनुमान लगाया गया है लेकिन मलेरिया ने हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी अपना प्रकोप समय पर दिखाना शुरु कर दिया है। जिसने सरकारी इंतजामों की पोल भी खोल दी है।

इससे बचके रहना रे बाबा

क्या आप जानते हैं कि मादा मच्छर 'मसकिटो' मलेरिया के लिए जिम्मेदार होता है। मसकिटो मच्छर के एक डंक से ही आपको मलेरिया हो सकता है। इसके काटने के बाद शरीर की रक्त नलियों में प्लासमोडियम फाल्सिपरम नाम का इन्फेक्शन फैल जाता है। जिसके बाद यह धीरे-धीरे अपना प्रकोप मलेरिया के रूप में दिखाना शुरू कर देता है।

हर साल एक मिलियन मामले

द हैल्थ साइट नाम की वेबसाइट की रिपोर्ट की माने तो भारत में हर साल एक मिलियन मलेरिया के मामले सामने आते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में वर्ष 2010 में छ लाख से ज्यादा लोग मलेरिया से ही मौत के मुह में चले गए।

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