वोट के ख़ातिर बेचैनी में भाजपा-कांग्रेस

एक पक्षिए निर्णय
केवल महाराष्ट्र लोकल के लिए बढ़ा हुआ किराया वापस लेने के फै़सल को एक पक्षिए कहा जाने लगा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि नरेंद्र मोदी सरकार मध्य वर्ग को राहत पहुंचाने के लिए वास्तव में कदम उठाना चाहती थी तो पूरे देश में मध्य वर्ग को राहत देनी चाहिए थी। गौरतलब है कि दिल्ली के नजदीक पड़ने वाले उत्तर-प्रदेश के नजदीकी ग्रामीण क्षेत्रों व शहरों से कई लोग दिल्ली नौकरी करने आते हैं जिनको साप्ताहिक अवकाश में घर जाना होता है। इस फैसले से ऐसा ही एक बड़ा तबका इस राहत से वंचित रह गया है।
इतना महंगा हो जाता महाराष्ट्र लोकल टिकट
यदि नरेंद्र मोदी सरकार अचानक किराए में राहत नहीं देती तो महाराष्ट्र लोकल ट्रेन में महीने का टिकट 495 रुपए होता, जिसके लिए फिलहाल 245 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। हालाकि इससे महाराष्ट्र में रहने वाले एक मध्यम आय वर्ग के तबके को काफी फायदा हुआ है।
कांग्रेस में भी घबराहट
हाल ही सम्पन्न हुए लोकसभा चुनाव 2014 में भाजपा के सामने कांग्रेस को बहुत बुरी हार झेलनी पड़ी है। जिसके बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस व राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी में भी वोटबैंक को लेकर सुगबुगाहट देखी जा रही है। भविष्य में हार की आशंका के चलते हुए सत्ताधारी कांग्रेस व सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी मराठा व मुस्लिम समुदाय को आरक्षण देकर राजनीतिक जमीन सुरक्षित करने की फिराक में लगी हुई है।












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