शिवसेनाः तो इसलिए लड़खड़ाया भाजपा-शिवसेना गठबंधन
मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के कुछ दिन बचे हैं लेकिन भाजपा-शिवसेना के बीच शुरू हुआ सीटों को लेकर विवाद अभी तक खत्म नहीं हुआ है। शिवसेना ने मंगलवार को हुई बैठक में भाजपा को फिर से 126-130 सीट देने के लिए हामी भर दी थी। लेकिन लगता है कि लड़ाई सीटों के बंटवारे की नहीं है, दरअसल, मुख्यमंत्री रेस हो रही है।

अब तक के परिद्रश्य को देखते हुए यह संकेत मिल रहे हैं कि भाजपा को यह भय है कि कहीं शिवसेना ने अधिक सीटों पर विजय प्राप्त की तो वह मुख्यमंत्री पद के लिए अड़ जाएगी। यही वजह है कि भाजपा शिवसेना के हर प्रस्ताव पर पूरी गहराई से सोच विचार कर रही है।
अभी तक कोई अंतिम फैसला न होना यही दर्शा रहा है कि शिवसेना औऱ भाजपा में अब सीटों को लेकर नहीं बल्कि संभावित मुख्यमंत्री सीट पर लड़ाई हो रही है।
दरअसल, भाजपा के कार्यकर्ता और कई नेता यह मान रहे हैं कि नरेंद्र मोदी की हवा के कारण मोदी से सहानुभूति रखने वाला एक तबका शिवसेना की सीट पर भी वोट देगा। अगर ऐसा ही हुआ तो शिवसेना ज्यादा सीटों पर लड़कर ज्यादा सीटों पर जीत सकती है।
इधर खबरें हैं कि अन्य छोटी सहयोगी पार्टियों ने शिवसेना की ओर से ज्यादा सीटों पर लड़ने की जिद्द पर ऐतराज जता दिया है। छोटी पार्टियों के नेता भी अब भाजपा से चर्चा कर रहे हैं। अब भाजपा छोटी पार्टियों को ज्यादा सीट दिलवाने के बदले में शिवसेना पर भाजपा अपना हित साधने की ओर बढ़ गई है।
इसका स्पष्ट् उदाहरण यह है कि छोटी अन्य सहयोगी पार्टियों ने शिवसेना की ओऱ से भाजपा को दी जाने वाली कम सीटों के प्रस्ताव पर नाराजगी व्यक्ति की है तो वहीं भाजपा छोटी सहयोगी पार्टियों को ज्यादा सीट दिलवाने के लिए लोबिंग कर रही है।












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