रेमंड ग्रुप के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया की आत्मकथा के प्रकाशन और बिक्री पर रोक, बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश
मुंबई। रेमंड ग्रुप के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया की आत्मकथा एन इनकम्प्लीट लाइफ के प्रकाशन, बिक्री और प्रसार पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने अगले आदेश तक रोक लगाई है। विजयपत सिंघानिया अपनी आत्मकथा को लेकर चर्चा में हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने पब्लिशर और डिस्ट्रीब्यूटर से अगले आदेश तक किताब की छपाई और बिक्री को रोकने के आदेश दिए हैं। यह आदेश हाईकोर्ट ने विजयपत सिंघानिया के बेटे गौतम सिंघानिया की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। गौतम सिंघानिया रेमंड ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। पिता और पुत्र के बीच यह कानूनी लड़ाई पिछले तीन साल से चल रही है।

2018 से चल रही बाप-बेटे के बीच कानूनी लड़ाई
बेटे गौतम सिंघानिया ने 2018 के सितंबर में ठाणे सिविल कोर्ट में विजयपत सिंघानिया और प्रकाशक के खिलाफ केस दायर किया था। इस केस में विजयपत सिंघानिया की आत्मकथा के प्रकाशन पर रोक लगाने की मांग की गई थी। बेटे गौतम सिंघानिया का कहना था कि इस किताब में उनको बंदनाम करने वाली बातें लिखी गई हैं। ठाणे कोर्ट ने 2019 के अप्रैल में इस आत्मकथा के प्रकाशन पर रोक लगाने का फैसला दिया था। लेकिन किताब एन इनकम्प्लीट लाइफ का प्रकाशन भी हुआ और बिकने के लिए यह बाजार में और ऑनलाइन भी उपलब्ध है। अब गौतम सिंघानिया ने हाईकोर्ट की शरण ली है। 31 अक्टूबर को उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में 232 पेज की इस किताब के प्रकाशन और बिक्री के खिलाफ केस दायर किया और दावा किया कि पिता विजयपत सिंघानिया ने चोरी-छुपे इसको प्रकाशित करा लिया।

होईकोर्ट में आत्मकथा पर रोक लगाने की अपील
गौतम सिंघानिया और रेमंड लिमिटेड के वकीलों ने हाईकोर्ट से अपील की कि प्रकाशक मैकमिलन पब्लिशर्स इंडिया और इस किताब के वितरक अमेजन इंडिया लिमिटेड को आगे इसके प्रकाशन और बिक्री से रोका जाय। हाईकोर्ट में दायर केस में कहा गया कि विजयपत सिंघानिया और प्रकाशकों ने ठाणे सिविल कोर्ट के 2019 के अप्रैल में दिए गए आदेश की अवहेलना की है। उस आदेश में ठाणे सिविल कोर्ट ने किताब की रिलीज पर रोक लगाई थी। वकीलों ने यह भी कहा कि किताब को प्रकाशित कर अदालत की अवमानना की गई है इसलिए यह केस अवमानना का भी बनता है क्योंकि विजयपत सिंघानिया और प्रकाशक ने जानबूझकर ऐसा किया है। कहा कि दिवाली की वजह से ठाणे कोर्ट बंद है इसलिए त्वरित सुनवाई के लिए हाईकोर्ट की वकेशन बेंच में अपील दायर की गई है।

विजयपत सिंघानिया के वकील ने किया विरोध
रेमंड लिमिटेड की तरफ से दायर की गई अवमानना याचिका का विजयपत सिंघानिया के वकीलों ने विरोध किया और बेंच के सामने अपनी दलील दी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस एस पी तवाडे ने आदेश में कहा कि ऐसा लग रहा है कि निचली अदालत के आदेश के बावजूद प्रतिवादियों ने आत्मकथा का प्रकाशन किया है। इस किताब को अमेजन के जरिए डिजिटल कॉपी और हार्ड कॉपी में बेचा जा रहा है। इसको रोके जाने की जरूरत है क्योंकि प्रतिवादियों के खिलाफ पहले से ऐसा आदेश है। वादियों की और ज्यादा हानि न हो इसको देखते हुए फिर से इस पर रोक लगाने का आदेश दिया जाता है। 25 नवंबर को इस केस की आगे सुनवाई होगी तब तक बेंच ने प्रतिवादियों को ठाणे सिविल कोर्ट के अप्रैल 2019 में दिए गए आदेश का उल्लंघन नहीं करने का आदेश दिया है।












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