शिवसेना और भाजपा में फंसा गेम, किसके हाथ लगेगी बीएमसी की चाभी

बीएमसी पोल 2017 के नतीजे आने के बाद अब गेम शिवसेना और भाजपा के बीच फंस गया है।

मुंबई। बीएमसी पोल 2017 के नतीजे आने के बाद अब गेम शिवसेना और भाजपा के बीच फंस गया है। लोकसभा चुनाव 2014 और महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव साथ-साथ लड़ने के बाद पहली बार शिवसेना और भाजपा अलग-अलग चुनाव मैदान में थे। बीएमसी की 227 सीटों पर हुए चुनाव में 84 सीटें शिवसेना, भाजपा ने 82, कांग्रेस ने 31, अन्‍य ने 14, एनसीपी ने नौ, एमएनएस ने सात सीटें जीतीं हैं। पर चुनाव नतीजे आने के बाद किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिल पाया है। बीएमसी पोल 2017 नतीजों में शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है तो वहीं भाजपा भी उससे सिर्फ तीन सीटें ही उससे पीछे हैं। पर बीएमसी की चाभी उसी के हाथ लगेगी जिसके पास कुल 114 सीटें होंगी।

शिवसेना और भाजपा में फंसा गेम, किसके हाथ लगेगी बीएमसी की चाभी

शिवसेना को बहुमत के लिए 30 सीटों की जरूरत

शिवसेना को बहुमत के लिए 30 सीटों की जरूरत

बीएमसी में पूर्ण बहुमत पाने के लिए शिवसेना को कुल 30 सीटों की जरूरत है। और यह 30 महत्‍वपूर्ण सीटें भाजपा के अलावा सिर्फ सीटें कांग्रेस के पास हैं। जिसके खाते में इस बार सिर्फ 31 सीटें ही आई हैं। अगर शिवसेना का गठबंधन कांग्रेस के साथ हाता है तो शिवसेना के हाथ में बीएमसी की सत्‍ता होगी। इसके अलावा दूसरा विकल्‍प है कि शिवसेना फिर से अपने सहयोगी भाजपा के साथ जाकर बीएमसी की सत्‍ता में काबिज हो।

उद्धव ठाकरे का क्‍या होगा निर्णय

उद्धव ठाकरे का क्‍या होगा निर्णय

पर पूर्व में दिए गए बयानों को देखते हुए गठबंधन की पूर्ण संभावना अभी नहीं दिख रही है। क्‍योंकि चुनावों से पूर्व ही शिवसेना ने साफतौर पर कह दिया था कि महाराष्‍ट्र की भाजपा सरकार नोटिस पर चल रही है। ऐसे में यह देखना रोचक होगा कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे बीएमसी चुनाव परिणामों के बाद क्‍या निर्णय करते हैं?

भाजपा का साथी को साथ लेकर चलने का बयान

भाजपा का साथी को साथ लेकर चलने का बयान

वहीं भाजपा सांसद किरीट सौमेया ने बीएमसी चुनाव परिणामों के बाद कहा है कि भाजपा का प्रदर्शन अच्‍छा रहा है और भाजपा ने विकास और पारदर्शिता को चुना है। साथ ही उन्‍होंने यह भी कहा कि वो इस रास्‍ते में मित्र पक्ष को साथ में लेकर चलेंगे। अप्रत्‍यक्ष तौर पर उन्‍होंने शिवसेना के साथ गठबंधन की संभावनाओं पर जोर दिया।

शिवसेना से ज्‍यादा भाजपा को फायदा

शिवसेना से ज्‍यादा भाजपा को फायदा

बीएमसी पोल 2012 के चुनाव परिणामों से तुलना करने पर पता चलता है कि शिवेसना को इस बार 9 सीटों की बढ़त हासिल हुई हैं। वर्ष 2012 में शिवसेना के खाते में सिर्फ 75 सीटें आई थीं। वहीं बीएमसी चुनावों में भाजपा को 51 सीटों की बढ़त हासिल हुई है और वो 31 सीटों से बढ़कर 82 सीटों पर पहुंच गई है। वहीं कांग्रेस की सीटों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। कांग्रेस के पास जहां 52 सीटें थी वो घटकर अब 31 हो गई हैं। वहीं एमएनएस को भी घाटा उठाना पड़ा है और उसकी सीटें 27 से घटकर 7 हो गई हैं। वहीं अन्‍य पार्टियों की सीटों की संख्‍या में भी 21 सीटें कम हुई हैं और उनके खाते में सिर्फ 14 सीटें ही आई हैं। इस बार चुनावों में एनसीपी को दो सीटों का फायदा हुआ है और उसे 9 सीटें मिली हैं।

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