मुंबई के 48 लाख लोगों के लिये बेस्ट नहीं रही बेस्ट बसें
मुंबई। यह सभी जानते हैं कि देश की आर्थिक राजधानी की धुरी मीडियम क्लास परिवारों के कंधों पर टिकी है। अब यही मिडिल क्लास परिवार टेंशन में हैं। कारण है मुंबई की बेस्ट बसें, जिसकी वजह से 48 लाख लोगों की जेबों पर डाका पड़ गया है। हाल ही में बसों का किराया बढ़ने की वजह से यात्री परेशान हैं।
सबसे पहले कुछ आंकड़े-
- बॉम्बे इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रामवे (बेस्ट) की करीब 3,600 बसें शहर में चलती हैं
- प्रति दिन इन बसों पर 48 लाख लोग यात्रा करते हैं
- ये बसें कुल 365 मार्गों (रूट) पर चलती हैं
- कंपनी में कुल 22 हजार बस ड्राइवर-कंडक्टर हैं
- कंपनी की स्थापना 1905 में हुई थी, उससे पहले कंपनी ट्रैम चलाती थी
- बसों के अलावा बेस्ट मोनारी क्रीक में फेरी सेवा भी मुहैया कराती है
यात्री क्यों हैं परेशान?
हाल ही में बेस्ट बसों के किराये में 50 से 70 फीसदी का इजाफा कर दिया गया। जिस रूट पर यात्री को 10 रुपए देने होते थे, अब 15 रुपए देने पड़ रहे हैं। वहीं डेली पास की बात करें तो पहले जो पास 40 रुपए का था, अब 70 रुपए का ओ गया है।
क्या कहते हैं यात्री
नवी मुंबई के ऐरोली में रहने वाले आम आदमी पार्टी के सदस्य एवं बिजनेसमैन आनंद सक्सेना का कहना है कि बसों का किराया बढ़ाने का मतलब सीधा-सीधा लेबर क्लास की पीठ पर चोट करने जैसा है। क्योंकि लेबर क्लास सबसे ज्यादा बस में सफर करते हैं। उसके बाद मिडिल क्लास और छात्र-छात्राएं। चूंकि आप हर जगह लोकल ट्रेन से नहीं जा सकते हैं, इसलिये बस ही एक मात्र सहारा बचती है।
आप सदस्य का कहना है कि ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर नितिन गडकरी को इस बारे में सोचना चाहिये, क्योंकि महाराष्ट्र की जनता ने ही उन्हें संसद तक पहुंचाया है और अब अकर उसी जनता पर ऐसे बोझ डालेंगे, तो जनता ठगा हुआ महसूस करेगी।
कपड़ा फैक्ट्री में काम करने वाले जीतेंद्र यादव का कहना है कि बसों का किराया बढ़ने से सबसे ज्यादा परेशानी फैक्ट्री वर्कर्स को हो रही है। क्योंकि सैलरी में इजाफा तो हो नहीं रहा, खर्च बढ़ते जा रहे हैं।













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