बेंगलुरु में लड़कियों के साथ छेड़छाड़ पर बोले आमिर- ऐसी घटनाओं से शर्म आती है
बेंगलुरु में नए साल के स्वागत करने के दौरान लड़कियों के साथ हुई छेड़छाड़ की घटना पर हिंदी फिल्मों के अभिनेता आमिर खान ने कहा कि ऐसी घटनाओं के चलते शर्म आती है और दुख होता है।
मुंबई। बेंगलुरु में नए साल के स्वागत करने के दौरान लड़कियों के साथ हुई छेड़छाड़ की घटना पर हिंदी फिल्मों के अभिनेता आमिर खान ने कहा कि ऐसी घटनाओं के चलते शर्म आती है और दुख होता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में राज्य और केंद्र को साथ मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने साथ ही कहा कि जैसे-जैसे कानून को मजबूत किया जाएगा, वैसे-वैसे न्यायपालिका मजबूत होकर तेजी के साथ काम करेगी और उसमें बदलाव आएंगे।

आपको बताते चले कि मुंबई और दिल्ली से अधिक सुरक्षित कहा जाना वाला बेंगलुरु अब इस मामले में दिल्ली की बराबरी करने की होड़ में लगा हुआ था। पर न्यू ईयर सेलिब्रेशन के दिन जो नजारा देखने को मिला उससे इस बात की पुष्टि हो जाती है। जहां एक ओर लोग 2017 का स्वागत करने के जश्न में लगे हुए थे, वहीं दूसरी ओर बेंगलुरु की सड़कों पर कुछ उपद्रवी लोग लगातार कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते दिखे। कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई थी कि जो कुछ ऐसे ही कहानी बयां कर रही थी कि बेंगलुरु में अब महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सड़कों पर इस बात की होड़ सी दिखी कि आखिर कौन कितना अधिक नशे में धुत हो सकता है। यह स्थिति खासकर ब्रिगेड रोड और एमजी रोड पर देखने को मिली। हालांकि, पुलिस ने नशे में गाड़ी चलाने की वजह से करीब 500 गिरफ्तारियां की थी, पर सड़कों पर स्थिति इससे भी अधिक खराब थी। शहर भर में बहुत सी महिलाओं को नशे में धुत लोगों से परेशान होना पड़ा। न्यू ईयर की शाम की घटनाओं के बाद बहुत सी महिलाओं ने उन्हें छेड़ने, गंदे कमेंट करने, उनका पीछा करने, नशे में धुत लोगों की भीड़ द्वारा दौड़ाए जाने जैसी की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई। कुछ तस्वीरें भी सामने आई थी कि किस तरह नशे में धुत लोगों की भीड़ महिला को दौड़ा रहे थे। हालांकि, पुलिस ने शिकायतों की संख्या को कम दिखाकर स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन आंकड़ों ने बेंगलुरु को दिल्ली और मुंबई से भी डरावनी जगह बना दिया है। पुलिस के एडिशनल डायरेक्टर जनरल प्रवीन सूद ने बेंगलुरु पुलिस के कमिश्नर का पद संभाला है। उन्होंने एक इंटरव्यू में भी कहा था कि खुद को ऐसा सभ्य कहने का भी क्या मतलब है, जहां पर महिलाएं, बच्चे और बूढ़े ही सुरक्षित नहीं हैं।












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