Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

मुरैना जिला अस्पताल में भीषण आग: एक मरीज की मौत, फायर सेफ्टी सिस्टम नाकाम, प्रशासन पर उठे सवाल

Morena news: मुरैना जिला अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में बुधवार शाम लगी भीषण आग ने प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी। आग में एक मरीज की दम घुटने से मौत हो गई, जबकि 200 से अधिक मरीजों की जान खतरे में पड़ गई।

शॉर्ट सर्किट को हादसे का कारण बताया गया है, लेकिन फायर सेफ्टी सिस्टम की विफलता सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गई है।

Morena News Huge fire in government hospital one patient died fire safety system failed

कैसी लगी आग, अफरा-तफरी, और एक मौत

मुरैना जिला अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में बुधवार शाम 5:35 बजे सर्जिकल ऑपरेशन थिएटर के बाहर लगे इलेक्ट्रॉनिक पैनल में अचानक आग लग गई। आग ने तेजी से मुख्य OT, बर्न यूनिट, और सर्जिकल वार्ड को अपनी चपेट में ले लिया। सर्जिकल वार्ड के बगल वाली गैलरी में धुआं फैलने से मरीजों और उनके परिजनों में भगदड़ मच गई। उस समय अस्पताल में 200 से अधिक मरीज भर्ती थे, जिनमें से कई गंभीर हालत में थे।

आग लगते ही मरीजों के परिजन और अटेंडर उन्हें लेकर बाहर की ओर भागे। इस जल्दबाजी में एक मरीज का ऑक्सीजन मास्क निकल गया, और जब तक उसे बाहर लाया गया, तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। कुछ मरीजों को अटेंडरों ने बाहर निकाला, जबकि कई मरीज अपनी ड्रिप निकालकर खुद ही भागे। एक मरीज को घिसटते हुए बाहर निकलते देखा गया, जो इस घटना की भयावहता को दर्शाता है। सर्जिकल वार्ड और वार्ड नंबर 1 के सभी मरीजों को तत्काल बाहर निकाला गया, और कुछ को पास के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में स्थानांतरित किया गया।

फायर सेफ्टी सिस्टम की विफलता: सायरन और पाइपलाइन निष्क्रिय

इस हादसे ने मुरैना जिला अस्पताल के फायर सेफ्टी सिस्टम की लचर व्यवस्था को पूरी तरह से बेपर्दा कर दिया। अस्पताल में फायर सेफ्टी के लिए पाइपलाइन तो स्थापित की गई है, लेकिन न तो इसकी सीटी बजी और न ही सायरन ने काम किया। यह गंभीर लापरवाही मरीजों और कर्मचारियों की जान को और खतरे में डाल सकती थी। कर्मचारियों ने अपने स्तर पर अग्निशमन यंत्रों का उपयोग कर आग पर काबू पाने की कोशिश की, और समय रहते आग को बुझा लिया गया।

किसी ने घटना की सूचना फायर ब्रिगेड को दी人格:दमकल वाहन को बुलाया गया, लेकिन वह अस्पताल के अंदर तक नहीं पहुंच सका, क्योंकि संकरे रास्तों और भीड़ के कारण वाहन को परिसर में प्रवेश करने में कठिनाई हुई। इस देरी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया, क्योंकि धुआं तेजी से पूरे वार्ड में फैल रहा था।

आग का कारण, शॉर्ट सर्किट और ओवरलोड

प्रारंभिक जांच में आग का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है, जो बिजली के ओवरलोड और वोल्टेज फ्लक्चुएशन के कारण हुआ। सिविल सर्जन डॉ. गजेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक पैनल में आग लगने के बाद वह तेजी से फैली, लेकिन कर्मचारियों की तत्परता से आग पर काबू पा लिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, हालांकि सोशल मीडिया पर एक मरीज की मौत की खबरें वायरल हो रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि पुरानी बिल्डिंग में वायरिंग और इलेक्ट्रिकल सिस्टम पुराने हो चुके हैं, जो बार-बार ओवरलोड की समस्या पैदा करते हैं। मुरैना जिला अस्पताल, जो 350 बेड का सरकारी अस्पताल है, में अल्ट्रासाउंड, ब्लड बैंक, ईसीजी, और लेंस प्रत्यारोपण जैसी सुविधाएं हैं, लेकिन इसके इन्फ्रास्ट्रक्चर को अपडेट करने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।

मरीजों और परिजनों का आक्रोश, अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप

घटना के बाद मरीजों और उनके परिजनों में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ गुस्सा देखा गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन ने मरीजों को बाहर निकालते समय ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराए, जिसके कारण एक मरीज की जान चली गई। एक परिजन ने कहा, "अस्पताल में इतने मरीज थे, लेकिन कोई सही व्यवस्था नहीं थी। अगर सायरन बजा होता, तो शायद स्थिति इतनी खराब न होती।"

सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखी गईं। X पर एक यूजर ने लिखा, "मुरैना जिला अस्पताल में आग लगी और मरीजों को ऑक्सीजन नहीं मिला। यह सरकार की नाकामी है।" एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया, "जब फायर सेफ्टी सिस्टम ही काम नहीं करता, तो उसे लगाने का क्या फायदा?"

Morena news: जांच के आदेश

जिला कलेक्टर और प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। जिला कलेक्टर ने एक बयान में कहा, "आग पर समय रहते काबू पा लिया गया है, और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।" प्रशासन ने अस्पताल परिसर को खाली करा लिया है, और मरीजों को पास के सिविल अस्पताल अंबाह और अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्थानांतरित किया जा रहा है।

मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री (जिनका नाम उपलब्ध नहीं है) ने भी इस घटना पर दुख जताया और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। हालांकि, विपक्षी दल कांग्रेस ने इस घटना को सरकार की लापरवाही का परिणाम बताया। कांग्रेस प्रवक्ता अभय दुबे ने कहा, "मुरैना जिला अस्पताल की यह घटना दर्शाती है कि बीजेपी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कितनी गंभीर है। फायर सेफ्टी सिस्टम का न काम करना शर्मनाक है।"

मुरैना में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति

मुरैना जिला अस्पताल जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, जो 350 बेड की क्षमता के साथ क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र है। इसके अलावा, अंबाह में 58 बेड का सिविल अस्पताल और जिले में दो शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। हालांकि, पुरानी बिल्डिंग, अपर्याप्त स्टाफ, और पुराने उपकरणों की समस्या लंबे समय से चली आ रही है।

2024 में, मुरैना जिला अस्पताल के नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में आग लगने की घटना ने भी सुर्खियां बटोरी थीं, जब नवजात शिशुओं को दूसरे वार्ड में स्थानांतरित करना पड़ा था। उस समय भी शॉर्ट सर्किट को कारण बताया गया था, लेकिन कोई ठोस सुधार नहीं किए गए। यह ताजा घटना इस बात को रेखांकित करती है कि अस्पताल के इन्फ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की तत्काल आवश्यकता है।

Morena news: क्या है कानूनी पहलू

यह घटना मोटर वाहन अधिनियम या आपराधिक कानूनों से सीधे तौर पर संबंधित नहीं है, लेकिन यह लापरवाही और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने का मामला हो सकता है। यदि जांच में यह साबित होता है कि अस्पताल प्रबंधन या रखरखाव कर्मचारियों की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ, तो भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304A (लापरवाही से मृत्यु का कारण बनाना) के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसके अलावा, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत भी फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन जांच का विषय हो सकता है।

सामाजिक कार्यकर्ता विकास शर्मा ने कहा, "मुरैना जैसे शहरों में स्वास्थ्य सेवाएं पहले से ही बदहाल हैं। इस तरह की घटनाएं जनता का सरकारी अस्पतालों से भरोसा उठा देती हैं। सरकार को तत्काल अस्पतालों के लिए बजट बढ़ाना चाहिए।"

भविष्य की चुनौतियां और सुझाव

मुरैना जिला अस्पताल की यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। पहला, अस्पतालों में फायर सेफ्टी सिस्टम की नियमित जांच और रखरखाव क्यों नहीं किया जाता? दूसरा, पुरानी बिल्डिंगों में इलेक्ट्रिकल सिस्टम को अपडेट करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? तीसरा, मरीजों की सुरक्षा के लिए आपातकालीन निकासी योजनाएं क्यों लागू नहीं हैं?

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+