Morena news: मुरैना गांव में साढ़े तीन दिन की मेहमानी करने पहुँचे हैं द्वारकाधीश

मुरैना गांव मेहमान बनकर पहुंचे द्वारिकाधीश, साढ़े तीन दिन तक करेंगे मेहमानी, दाऊजी मंदिर में रहते हैं द्वारिकाधीश विराजमान, गांव में रहता है उत्सव का माहौल, बड़ी संख्या में पहुंचते हैं श्रद्धालु

Morena गांव मैं बुधवार के दिन से उत्सव शुरू हो गया है क्योंकि बुधवार को मुरैना गांव में मेहमानी करने के लिए द्वारिकाधीश पहुंच गए हैं। द्वारिकाधीश अपनी द्वारिका छोड़कर साढ़े तीन दिन तक मुरैना गांव के दाऊजी मंदिर में ही मेहमानी करेंगे। जब तक द्वारिकाधीश मुरैना गांव में विराजमान रहेंगे तब तक मुरैना गांव में उत्सव का माहौल रहेगा। इसके साथ ही मंदिर पर मेला भी चलता रहेगा।

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    300 सालों से चली आ रही है परंपरा

    300 सालों से चली आ रही है परंपरा

    मुरैना गांव के स्थानीय लोग बताते हैं कि पिछले 300 सालों से द्वारिकाधीश मुरैना गांव के दाऊजी मंदिर पर साढ़े तीन दिन की मेहमानी करने आते हैं। हर साल दीपावली के अगले दिन द्वारिकाधीश मुरैना गांव पहुंचते हैं और यहां साढ़े तीन दिन तक रुकते हैं। मुरैना गांव पहुंचने से पहले द्वारिकाधीश गोकुल जाते हैं और वहां गोवर्धन की पूजा के बाद मुरैना आ जाते हैं।

    द्वारिका में 3 दिन तक रहते हैं मंदिर के पट बंद

    द्वारिका में 3 दिन तक रहते हैं मंदिर के पट बंद

    दाऊजी मंदिर के पुजारी श्रीनिवास स्वामी बताते हैं कि जब तक द्वारिकाधीश मुरैना गांव में मेहमानी करते हैं उस दौरान द्वारिका में भगवान के पट बंद रहते हैं और वहां भगवान के दर्शन नहीं होते हैं क्योंकि द्वारकाधीश तो मुरैना में मेहमान कर रहे हैं। इसलिए द्वारिका में भगवान के मंदिर के पट बंद रखे जाते हैं।

    गांव में जन्म लेने वाले बच्चे को माना जाता है कृष्ण का बाल रूप

    गांव में जन्म लेने वाले बच्चे को माना जाता है कृष्ण का बाल रूप

    हर साल दिवाली के 15 दिन पहले गांव में जो बच्चा जन्म लेता है उसे भगवान कृष्ण का रूप माना जाता है और उसी बच्चे को भगवान कृष्ण का बाल रूप मानकर यहां झांकियां लगाई जाती हैं। पूरे गांव में उत्सव मनाया जाता है। इस साल भी मुरैना गांव में एक बच्चे ने जन्म लिया है जिसे इस बार श्री कृष्ण का बाल रूप माना जा रहा है।

    मुरैना गांव के कृष्ण भक्त संत गोपराम को भगवान ने दिए थे सपने में दर्शन

    मुरैना गांव के कृष्ण भक्त संत गोपराम को भगवान ने दिए थे सपने में दर्शन

    मुरैना गांव के ग्रामीण बताते हैं कि इस परंपरा की शुरुआत कृष्ण भक्त संत गोपराम स्वामी ने की थी। संत गोपराम स्वामी को भगवान श्री कृष्ण ने स्वप्न में दर्शन दिए थे और उन्हें स्वर्ग के लिए ले जाने लगे जिस पर गोपराम ने कहा कि आप मुझे लेने आए हैं यह सब लोगों को कैसे मालूम चलेगा। इसके बाद श्री कृष्ण ने कहा कि में हर साल मुरैना गांव में मेहमानी करने आया करूंगा। तभी से मुरैना गांव में द्वारिकाधीश के मेहमान बनकर आने की परंपरा चली आ रही है और इन साढ़े तीन दिन गांव में उत्सव मनाया जाता है।

    दूरदराज के लोग पहुंचते हैं भगवान के दर्शन करने

    दूरदराज के लोग पहुंचते हैं भगवान के दर्शन करने

    मुरैना गांव में द्वारिकाधीश के उत्सव में शामिल होने के लिए दूरदराज के लोग मुरैना गांव पहुंचते हैं और यहां साढ़े तीन दिन तक उत्सव का आनंद लेते हैं। मुरैना गांव में आयोजित मेले में भी आसपास के इलाकों के लोग शामिल होते हैं। कुल मिलाकर गांव में द्वारिकाधीश की मेहमानी के समय मुरैना गांव सुर्खियों में बना रहता है।

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