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Moradabad News: हिंदू नाम, मुस्लिम मालिक और शाकाहारी खाना… फूड जांच में ऐसे सामने आई असली सच्चाई

Moradabad News: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक ढाबे का नाम विवाद की वजह बन गया है। दिल्ली-लखनऊ हाईवे-9 पर स्थित 'नीलकंठ फैमिली ढाबा' का संचालन मुस्लिम युवक शराफत कर रहा था। फूड सेफ्टी विभाग की जांच के बाद नाम पर आपत्ति जताई गई।

फूड विभाग की टीम जब ग्राहक संतुष्टि के लिए क्यूआर कोड लगाने पहुंची, तब संचालक के नाम को लेकर सवाल उठे। विभाग को ढाबे पर 'नीलकंठ' नाम के बोर्ड मिले, जबकि दस्तावेज़ों में मालिक का नाम शराफत था, जिससे विवाद की स्थिति बनी।

Moradabad news highway dhaba

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि ढाबे पर फूड सेफ्टी विभाग का वैध पंजीकरण पहले से मौजूद था। इसके बावजूद विभाग ने मौखिक रूप से सलाह दी कि या तो नाम बदला जाए या ढाबा अस्थायी रूप से बंद किया जाए। संचालक ने पहला विकल्प चुना।

सभी बोर्ड हटाए गए, ढाबा फिलहाल बंद

संचालक के बेटे खालिद ने जानकारी दी कि विवाद को बढ़ने से रोकने के लिए नीलकंठ नाम के सभी साइनबोर्ड हटा दिए गए हैं। साथ ही पूरे सावन माह तक ढाबा बंद रखने का फैसला किया गया है। नया नाम तय करने की प्रक्रिया चल रही है।

खालिद ने बताया कि उनके होटल में पूरी तरह शुद्ध शाकाहारी भोजन परोसा जाता है। रसोई में काम करने वाले सभी कारीगर हिंदू समुदाय से हैं। बावजूद इसके, नाम को लेकर विवाद न पैदा हो, इसीलिए होटल को अस्थायी रूप से बंद किया गया।

कर्मचारी हुए बेरोजगार, ग्राहक भी हुए परेशान

ढाबे पर काम करने वाले रसोइया चंद्रपाल का कहना है कि वह पिछले पांच महीने से यहां कार्यरत हैं। अब होटल बंद होने से उन्हें काम की चिंता सता रही है। ढाबे में कुल चार-पांच रसोइये कार्यरत थे, सभी फिलहाल बेरोजगार हो गए हैं।

ढाबे पर भोजन करने आए एक ट्रक ड्राइवर इकबाल ने कहा कि वे मुस्लिम हैं, लेकिन यहां का शाकाहारी खाना उन्हें पसंद आता था। होटल बंद होने से अब उन्हें सफर के दौरान खाने की परेशानी होगी, क्योंकि यह जगह सुविधाजनक थी।

विभाग ने दी थी मौखिक चेतावनी

मुरादाबाद के सहायक आयुक्त (फूड सेफ्टी) राजवंश श्रीवास्तव ने बताया कि ढाबे की जांच की गई थी। निरीक्षण में लाइसेंस सहित अन्य कागजात सही पाए गए। हालांकि, नाम को लेकर स्थानीय स्तर पर आपत्ति की आशंका को देखते हुए सुझाव दिया गया।

उन्होंने बताया कि विभाग ने संचालक से कहा था कि या तो नाम बदल लें या ढाबे को बंद कर दें। मालिक ने स्वेच्छा से नाम बदलने का निर्णय लिया है। नीलकंठ नाम से जुड़े सभी बोर्ड और प्रतीक चिह्न अब हटा लिए गए हैं।

चूंकि सावन का महीना धार्मिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील होता है, इसलिए होटल संचालक ने फिलहाल ढाबे को बंद रखने का निर्णय लिया है। उनका मानना है कि यह कदम शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचाव के लिए जरूरी है। ढाबे का नया नाम सावन खत्म होने के बाद तय किया जाएगा। तब तक होटल पूरी तरह बंद रहेगा।

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