मझवां में होगा कड़ा मुकाबला, उपचुनाव की घोषणा के बाद निषाद पार्टी के नेता खामोश, BJP की बढ़ सकती है मुश्किल
Majhawan Assembly Bypoll 2024 News: लोकसभा चुनाव 2024 संपन्न होने के बाद उत्तर प्रदेश में रिक्त हुई विधानसभा सीटों पर उपचुनाव का ऐलान कर दिया गया है। मंगलवार को चुनाव आयोग द्वारा तारीखों का ऐलान किया गया।
चुनाव आयोग द्वारा तारीखों का ऐलान किए जाने के बाद जिन सीटों पर उपचुनाव होने हैं वहां पर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। चट्टी चौराहों पर प्रत्याशियों के नाम की चर्चा शुरू हो गई है। यूपी की 9 विधानसभा सीटों पर 13 नवंबर को मतदान होगा और 23 नवंबर को परिणाम आएगा।

इन 9 विधानसभा सीटों में मिर्जापुर जनपद की मझवां विधानसभा सीट भी शामिल है। इस सीट पर 2022 में निषाद पार्टी से डॉ विनोद बिंद विधायक बने थे, लेकिन बाद में 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान भदोही लोकसभा से भाजपा ने उन्हें चुनाव मैदान में उतार दिया।
इस लोकसभा में उन्होंने इंडिया गठबंधन के तहत तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी ललितेश पति त्रिपाठी को चुनाव हराया और भदोही लोकसभा सीट से सांसद बन गए। उनके सांसद बनने के बाद यह विधानसभा सीट रिक्त हो गई।
यह विधानसभा सीट कभी किसी एक राजनीतिक पार्टी के हाथ में नहीं रही है। कभी इस पर बसपा, कभी सपा तो कभी भारतीय जनता पार्टी का कब्जा रहा है। अब देखना यह है कि इस उपचुनाव में मझवां विधानसभा की जनता किस प्रत्याशी को तरजीह देती है।
चुनाव को ध्यान में रखते हुए समाजवादी पार्टी द्वारा इस विधानसभा सीट पर मझवां से तीन बार विधायक रहे और भदोही के पूर्व सांसद रमेश बिंद की बेटी डॉक्टर ज्योति बिंद को प्रत्याशी घोषित किया जा चुका है। इसके अलावा चंदौली सांसद वीरेंद्र सिंह को यहां का प्रभारी नियुक्त किया गया है।
भारतीय जनता पार्टी द्वारा अभी इस विधानसभा सीट पर प्रत्याशी के नाम का ऐलान नहीं किया गया है। काफी समय से एनडीए गठबंधन में शामिल निषाद पार्टी द्वारा यहां अपने प्रत्याशी को उतारने का दावा किया जा रहा है।
पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद भी खुद इस बारे में कई बार बयान दे चुके हैं। हाल ही में बीजेपी हाई कमान की बैठक में इस सीट पर भाजपा द्वारा प्रत्याशी उतारने का फैसला किया गया है। अब ऐसे में निषाद समाज पार्टी के नेता अंदरूनी तौर पर खामोश हो गए हैं।
अब देखना यह है कि भारतीय जनता पार्टी यह सीट निषाद पार्टी को देती है या निषाद पार्टी का कोई नेता भाजपा के चुनाव चिन्ह पर इस सीट पर चुनाव लड़ता है या फिर भारतीय जनता पार्टी खुद अपना उम्मीदवार उतारती है। जानकारों का कहना है कि निषाद पार्टी के नेताओं की खामोशी बीजेपी को भारी पड़ सकती है।












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