जानिए रियल लाइफ में मिर्ज़ापुर की गद्दी पर कब और किसने किया राज, कितने थे डकैत और कितने बाहुबली
मिर्जापुर वेब सीरीज में कालीन भैया का भौकाल तो आपने देखा ही होगा। इस वेब सीरीज में मिर्जापुर की गद्दी के लिए खूब जंग हुई थी। आज हम आपको बताएंगे कि रियल लाइफ में इस गद्दी पर डकैत से लेकर किस-किस बाहुबली ने राज़ किया है।

क्या आप जानते है कि रीयल लाइफ में भी मिर्जापुर जिले की गद्दी पर आज भी काबिज होने के लिए 'मिर्ज़ापुर' वेब सीरीज जैसा ही सीन है। मिर्जापुर की गद्दी पर चर्चित डकैत दस्यु सुंदरी फूलन देवी से लेकर चर्चित डकैत ददुआ शिव कुमार पटेल के भाई बाल कुमार पटेल सांसद रहे। जिले की गद्दी पर वर्षों तक इन्ही का एक तरफा राज रहा।

वहीं बदलते समय के साथ यहां की गद्दी पर पूर्वांचल के दो बड़े बाहुबली कहे जाने वाले विजय मिश्र व विनीत सिंह की नजर गड गई। पहली बार इस गद्दी की लड़ाई में विजय मिश्र विनीत सिंह पर भारी पड़े तो दूसरी बार विनीत ने विजय मिश्र को गद्दी से उखाड़ फेंका और स्वयं काबिज हो गए। जानिए गद्दी के वो सिकंदर जिन्होंने मिर्ज़ापुर में कब कब राज किया।

मिर्जापुर से पहली बाद डकैत फूलन पहली बनी थी सासंद
मिर्जापुर जिले में गद्दी को लेकर जंग सन 1996 में शुरू हुई थी। उस समय बैंडेड क्वीन के नाम से मशहूर दस्यु सुंदरी डकैत फूलन देवी मिर्जापुर जिले से समाजवादी पार्टी के टिकट पर सांसद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव के मैदान में आई। इस चुनाव में फूलन देवी का ख़ौफ़ इतना था कि वो भारी अंतर से जीत दर्ज करते हुए पहली बार सांसद बनकर लोकसभा पहुंची।
जिले के वरिष्ठ पत्रकार सलिल पाण्डेय बताते है कि जब फूलन देवी चुनाव मैदान में थी, तब उनकी लोकप्रियता इतनी ज्यादा थी कि वो जब वो अपनी गाड़ी से प्रचार के लिए निकलती थी तो लोगों का हुजूम उनके काफिले के पीछे दौड़ता था। फूलन देवी जब चुनाव लड़ी थी, तब उनका ठाकुरों ने जमकर विरोध किया था। हाल यह हो गया था कि कई जगहों पर आगजनी हुई और रास्ते बंद कर दिए गए। हालांकि कुछ ही सालों बाद सासंद रहते उनकी हत्या कर दी गई।

ददुआ के भाई बाल कुमार पटेल ने 2009 में संभाली थी कमान
चर्चित डकैत फूलन देवी की सांसद रहते उनकी हत्या कर दिए जाने के बाद कुछ दिनों के लिए पूरा जिला एकदम शांत हो गया। जिला भले ही शांत रहा, लेकिन गद्दी पर कब्जे के लिए सियासी रणनीतिकारों ने अपनी तैयारी जारी रखी। कई वर्षों तक पर्दे के पीछे से जिले की राजनीति की नब्ज को टटोलने वाले डकैत ददुआ शिव कुमार पटेल के भाई बाल कुमार पटेल 2009 लोकसभा चुनाव में सपा के टिकट पर सियासी अखाड़े में कूद पड़े।
डकैत ददुआ के भाई होने के साथ-साथ बाल कुमार पटेल के ऊपर भी उस समय कई मुकदमे दर्ज थे। 2009 के लोकसभा चुनाव में हाल यह हुआ कि समाजवादी पार्टी की टिकट से चुनाव जीतकर बाल कुमार पटेल सासंद बन गए। सासंद बनने के बाद बाल कुमार पटेल का 2014 तक जिले में अखंड राज्य चलता था।

मोदी लहर में लोकसभा का रास्ता बंद, लेकिन इस सीट के लिए भिड़े पूर्वांचल के दो बाहुबली
देशभर में सन 2014 में नरेंद्र मोदी की लहर आ जाने के बाद मिर्जापुर से माफिया व बाहुबलियों के लोकसभा जाने का रास्ता बंद हो गया। लोकसभा का रास्ता बंद होने के बाद पूर्वांचल के दो बाहुबलियों की नजर मिर्जापुर और सोनभद्र की एमएलसी की सीट पर टिक गई। 2014 में एकतरफा जीत के बाद केंद्र में भले ही नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गए, लेकिन उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार चल रही थी। जहां अखिलेश यादव सीएम थे। इसी बीच सन 2016 में मिर्जापुर व सोनभद्र एमएलसी सीट पर चुनाव होना था।
इस चुनाव में उस समय बसपा के कद्दावर नेता बाहुबली विनीत सिंह के भाई त्रिभुवन नारायण सिंह व बाहुबली विजय मिश्रा की पत्नी रामलली चुनाव मैदान में कूद पड़ी। इस चुनाव में बीडीसी के अपहरण से लेकर मारपीट तक की कई घटनाएं सामने आई। बाहुबली विनीत सिंह ने चुनाव के बीच कई बार विजय मिश्र पर एके 47 लेकर प्रचार करने, गोली चलवाने व बीडीसी उम्मीदवारो के अपरहण करने का आरोप लगाया। इस चुनाव में विजय मिश्र की पत्नी रामलली ने विनीत सिंह के भाई त्रिभुवन नारायण सिंह को हराकर दो जिलों की हॉट सीट पर कब्जा किया।

बीजेपी के टिकट पर एमएलसी चुनाव में जीते बाहुबली विनीत सिंह
सन 2017 में प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने के बाद जैसे ही बीजेपी की सरकार बनी और योगी आदित्यनाथ मूख्यमंत्री बने। वैसे ही पूरे प्रदेश में बाहुबलियों व माफियाओं पर भयंकर तरीके से कार्रवाई हुई। इस कार्रवाई की जद में विजय मिश्र आए, जहां ताबड़तोड़ कार्यवाई के बाद उनकी सियासी नींव हिल गई। बीजेपी सरकार बनने के बाद सन 2022 में फिर से मिर्जापुर व सोनभद्र सीट के लिए एमएलसी का चुनाव हुआ। चुनाव के दौरान अंतिम समय तक कशमकश के बाद भारतीय जनता पार्टी ने बाहुबली विनीत सिंह को चुनाव में प्रत्याशी घोषित कर दिया। विनीत सिंह के उम्मीदवार बनने के बाद सपा के प्रत्याशी ने अपना पर्चा वापस ले लिया। इस चुनाव में विनीत सिंह निर्विरोध एमएलसी चुन लिए गए।

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अतीक से लेकर मुख्तार अंसारी तक कि शरण स्थली थी मिर्ज़ापुर
एक जमाने में जिले में पूर्वांचल के माफिया मुख्तार अंसारी से लेकर बृजेश सिंह तक, अतीक अहमद से लेकर कई और बड़े माफिया भी बार-बार आपराधिक घटना के बाद यहाँ पनाह ले चुके हैं। एक जमाने में इन माफियाओं के शूटर भी कांड करने के बाद यहां आकर रहते थे। हाल फिलहाल में बिहार के कई माफिया व बाहुबली भी मिर्जापुर में रह चुके हैं। जिले में इन्ही माफियाओं की तलाश में कई बार एसटीएफ सहित कई पुलिस टीम छापेमारी भी कर चुकी है। मिर्जापुर जिले से भले ही कोई बाहुबली नही निकला, लेकिन यह जिला आस-पास के प्रदेश व पड़ोसी जिले के बाहुबलियों को खूब पसंद आया।












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