महाराष्ट्र में स्पीकर के चुनाव पर क्यों बैकफुट पर है MVA सरकार ? अंदर की बात जानिए

मुंबई, 29 दिसंबर: महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली महा विकास अघाड़ी सरकार मंगलवार को शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन तक विधानसभा के स्पीकर के चुनाव को लेकर अड़ी हुई थी। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी चुनाव तारीख को हरी झंडी देने की इसकी मांग पर विचार करने की बात कर रहे थे, लेकिन उद्धव सरकार के तेवर देखकर लग रहे थे कि वह अब गवर्नर की मंजूरी का भी इंतजार नहीं करेगी और अपनी तय योजना के तहत ध्वनि मत से ही नए स्पीकर का चुनाव करवा लेगी। लेकिन, आखिरी वक्त में ऐसी स्थिति पैदा हुई कि राज्य सरकार बैकफुट पर आ गई और इस चुनाव को अगले सत्र तक के लिए ठंडे बस्ते में डालने में ही भलाई समझी।

महाराष्ट्र में स्पीकर का पद कब से और क्यों खाली है?

महाराष्ट्र में स्पीकर का पद कब से और क्यों खाली है?

महाराष्ट्र की मौजूदा विधानसभा का गठन करीब दो साल पहले 2019 में हुआ था। महा विकास अघाड़ी सरकार की ओर से कांग्रेस के नाना पटोले महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर चुने गए थे। 2021 के फरवरी में उन्होंने अपने से इस्तीफा दे दिया, क्योंकि कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। कांग्रेस ने यह फैसला लेते वक्त सरकार की बाकी सहयोगियों शिवसेना और एनसीपी को विश्वास में नहीं लिया था, जिसने दोनों को नाराज कर दिया। विपक्षी बीजेपी तभी से स्पीकर के चुनाव की मांग करने लगी, लेकिन शिवसेना और एनसीपी इसका लगातार विरोध करती रही। बजट सत्र बीत गया, मानसून सत्र खत्म हो गया, लेकिन डिप्टी स्पीकर नरहरि सीताराम जिरवाल ही सदन का संचालन करते रहे। विपक्ष की मांग पर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को इस संबंध में लिखा भी, लेकिन उन्होंने तब कोविड-19 प्रोटोकॉल के नाम पर इस मांग को टाल दिया।

महाराष्ट्र में स्पीकर के चुनाव को लेकर अब क्या हुआ है ?

महाराष्ट्र में स्पीकर के चुनाव को लेकर अब क्या हुआ है ?

जब कांग्रेस ने अपने दोनों सहयोगी दलों का खूब मान-मनुहार किया तो आखिरकार उद्धव सरकार बीते शीतकालीन सत्र में स्पीकर के चुनाव के लिए तैयार हो गई। 24 दिसंबर को प्रदेश कैबिनेट ने 28 दिसंबर (सत्र के अंतिम दिन) को स्पीकर का चुनाव करवाने का फैसला लिया और राजभवन को इसकी सूचना दे दी। राज्यपाल को चिट्ठी भेजने के बाद प्रदेश के कैबिनेट मंत्रियों का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल कोश्यारी से मिला भी और कैबिनेट की सलाह के मुताबिक चुनाव की तारीख पर मुहर लगाने की गुजारिश की। इस प्रतिनिधिमंडल में बालासाहेब थोराट, एकनाथ शिंदे, छगन भुजबल जैसे मंत्री शामिल थे।

उद्धव सरकार ने स्पीकर के चुनाव के नियम में क्या बदलाव किया है ?

उद्धव सरकार ने स्पीकर के चुनाव के नियम में क्या बदलाव किया है ?

इस बीच पिछले हफ्ते प्रदेश विधानसभा की नियम समिति ने स्पीकर के चुनाव करवाने की प्रक्रिया में एक बहुत बड़ा बदलाव किया है। इसके तहत नियम में यह संशोधन किया गया है कि अब स्पीकर का चुनाव (नियम-6) और डिप्टी स्पीकर का चुनाव (नियम-7) के तहत गुप्त मतदान से न होकर ध्वनि मत से किया जाएगा। भाजपा के विरोध के मद्देनजर सरकार ने इस संशोधन को ध्वनि मत से ही पारित करवाया है। 27 दिसंबर को गवर्नर ने इसी आधार पर राज्य सरकार को लिखा कि वह स्पीकर के चुनाव संबंधी नियम में संशोधन की संवैधानिकता को लेकर कानूनी राय ले रहे हैं। उसी दिन महा अघाड़ी सरकार ने राज्यपाल को वापस लिखा कि नियमों में किया गया संशोधन 'संवैधानिक तौर पर सही' है और उनसे कैबिनेट की सलाह पर काम करने की गुजारिश की गई।

स्पीकर के चुनाव में गवर्नर की मंजूरी क्यों जरूरी है?

स्पीकर के चुनाव में गवर्नर की मंजूरी क्यों जरूरी है?

संविधान के आर्टिकल 178 में विधानसभा के स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के चुनाव की व्यवस्था है। जहां तक इसके चुनाव संबंधी नियम हैं तो उनमें अलग-अलग राज्यों में थोड़ा अंतर है। महाराष्ट्र विधानसभा के नियम 6 के मुताबिक 'राज्यपाल (स्पीकर के)चुनाव की तारीख तय करेगा और सचिव सभी सदस्यों को तय की गई तारीख सूचित करेगा।' राज्य विधानसभा के एक पूर्व सचिव ने कहा है कि स्पीकर का चुनाव तभी हो सकता है, जब राज्यपाल की ओर से इसकी तारीख पक्की की जाए।

स्पीकर के चुनाव नियम में संशोधन पर क्या आपत्ति है ?

स्पीकर के चुनाव नियम में संशोधन पर क्या आपत्ति है ?

महाराष्ट्र में विपक्ष का आरोप है कि एमवीए सबसे कमजोर सरकार है, जिसे अपने एमलए पर विश्वास नहीं है और डर रही है कि स्पीकर के चुनाव में कहीं वो क्रॉस-वोटिंग का शिकार न हो जाए, इसलिए ध्वनि मत से चुनाव कराने का रास्ता निकालकर लाई है। विपक्ष की यह भी दलील है कि स्पीकर की गैर-मौजूदगी में इस नियम में संशोधन नहीं किया जा सकता है। बीजेपी का यह भी कहना है कि मानसून सत्र के दौरान उसके 12 विधायकों को एक साल के लिए निलंबित किया गया है, ऐसे में स्पीकर का चुनाव करवाना उचित नहीं है।

स्पीकर के मुद्दे पर क्यों बैकफुट पर है उद्धव सरकार ?

स्पीकर के मुद्दे पर क्यों बैकफुट पर है उद्धव सरकार ?

शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन तक उद्धव सरकार ने पूरा जोर लगाया कि गवर्नर उसके दबाव में आकर स्पीकर चुनाव की तारीख पर मुहर लगा दें, लेकिन अचानक इसे अगले सत्र तक टाल देने का फैसला ले लिया गया। कहा जा रहा है कि इसका एक कारण यह हो सकता है कि कहीं राज्यपाल कोश्यारी राष्ट्रपति शासन की सिफारिश ना कर दें! क्योंकि, जानकारी के मुताबिक ध्वनि मत से चुनाव करवाने के लिए किए गए संशोधन की 'संवैधानिकता' पर वह सवाल उठा चुके हैं। मंगलवार को तो लग रहा था कि राज्य सरकार गवर्नर के आपत्तियों को दरकिनार करके भी चुनाव करवाने का इरादा कर चुकी है। लेकिन, जानकारी के मुताबिक एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने सीएम ठाकरे को समझाया कि जब तक इस मसले पर कानूनी राय स्पष्ट नहीं हो जाती, चुनाव टाल देने में ही भलाई है। (पहली तस्वीर के अलावा सभी फाइल)

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+