Ajit Pawar Demise: कौन हैं राणाजगजीतसिंह जिन्हें अजित पवार ने किया आखिरी कॉल? लैंडिंग के बाद होनी थी और बात
Ajit Pawar Last Call: महाराष्ट्र की राजनीति के 'संकटमोचक' और कद्दावर नेता अजित पवार के आकस्मिक निधन ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। 28 जनवरी 2026 की सुबह बारामती में हुआ वह विमान हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक युग का अंत साबित हुआ। हादसे से ठीक आधे घंटे पहले अपने भतीजे राणाजगजीतसिंह पाटील को किया गया उनका 'आखिरी फोन कॉल' अब एक ऐसी भावुक विरासत बन गया है, जो बार-बार उनके अपनों को झकझोर रहा है।
वह आवाज, जो हमेशा आदेश और मार्गदर्शन देती थी, अचानक खामोश हो गई। आज पूरा महाराष्ट्र उस नेतृत्व को याद कर रहा है जिसने प्रशासन में अनुशासन और रिश्तों में मजबूती की नई मिसाल पेश की थी।

Baramati Plane Cras: भतीजे राणाजगजीतसिंह को किया था आखिरी फोन
विमान में सवार होने से ठीक पहले अजित पवार ने अपने भतीजे और भाजपा विधायक राणाजगजीतसिंह पाटील से फोन पर बात की थी। यह कॉल एक सामान्य पारिवारिक और राजनीतिक चर्चा के लिए था, जिसमें उन्होंने बारामती लैंडिंग के बाद दोबारा बात करने का वादा किया था। राणाजगजीतसिंह ने भारी मन से बताया कि वह आवाज अभी भी उनके कानों में गूंज रही है। उस आधे घंटे के अंतराल में नियति ने ऐसा खेल खेला कि वह अगली बातचीत कभी मुमकिन ही नहीं हो पाई।
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Maharashtra Deputy CM Death:'मार्गदर्शक और हिम्मत थे काका'
राणाजगजीतसिंह पाटील के लिए अजित पवार सिर्फ एक राजनीतिक दिग्गज नहीं, बल्कि एक पिता तुल्य मार्गदर्शक थे। उन्होंने कहा कि बचपन से लेकर राजनीति के कठिन मोड़ों तक, 'काका' ने उन्हें हमेशा काम पर विश्वास करना और जनता के हित में फैसले लेना सिखाया। उनके लिए यह क्षति निजी से कहीं अधिक वैचारिक है। एक ऐसा व्यक्तित्व जिसने मुश्किल हालात में मजबूती से खड़ा रहना सिखाया, उसके जाने से पाटिल परिवार में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है जिसकी भरपाई नामुमकिन है।
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'सुन्न कर देने वाली वो खबर'
हादसे की खबर मिलते ही राणाजगजीतसिंह पाटील का मन सुन्न रह गया। उन्होंने बताया कि जिस व्यक्ति से चंद मिनट पहले प्यार और अधिकार से बात हुई हो, उसके अचानक चले जाने की खबर पर यकीन करना नामुमकिन था। यह अहसास कि जिंदगी एक पल में कैसे खत्म हो जाती है, उन्हें और पूरे परिवार को विचलित कर रहा है। वह आखिरी बातचीत अब उनके मन में एक भावनात्मक उथल-पुथल मचा रही है, जिसे वे ताउम्र नहीं भूल पाएंगे।
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राज्य के लिए अपूरणीय क्षति
अजित पवार का निधन सिर्फ एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि एक सक्रिय, अनुभवी और जनहितैषी नेतृत्व का अंत है। वे किसानों, मजदूरों और आम लोगों के मुद्दों पर जितनी पकड़ रखते थे, वैसा नेता मिलना मुश्किल है। भाजपा विधायक पाटील ने कहा कि महाराष्ट्र को लंबे समय तक इस सक्रिय नेतृत्व की कमी खलेगी। उनके जाने से राज्य की राजनीति में जो खालीपन आया है, उसने न केवल उनके समर्थकों को बल्कि उनके विरोधियों को भी स्तब्ध कर दिया है।












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