कौन हैं एकनाथ शिंदे जो 12 विधायकों के साथ हुए लापता, उद्धव ठाकरे सरकार पर बड़ा संकट

मुंबई, 21 जून। महाराष्ट्र सरकार मे मंत्री और शिवसेना के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे ने प्रदेश में शिवसेना की मुश्किल बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार पार्टी के 11 विधायकों के साथ वह गुजरात के सूरत पहुंच गए हैं और पार्टी के संपर्क से दूर हो गए हैं। जिस तरह से एकनाथ शिंदे और पार्टी के अन्य विधायक लापता हुए हैं उसने उद्धव ठाकरे सरकार की चिंता को बढ़ा दिया है। रिपोर्ट की मानें तो एकनाथ शिंदे पार्टी से खुश नहीं हैं। उनके साथ पालघर से पार्टी के विधायक श्रीनिवास वांगा, महेंद्र दालवी, शांताराम भी संपर्क से बाहर हैं। वहीं भाजपा का दावा है कि शिवसेना के 12 विधायकों के अलावा 5 निर्दलीय विधायक भी सूरत के होटल में हैं।

eknath shinde

प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं शिंदे
जिस तरह से महाराष्ट्र में विधान परिषद के चुनाव में क्रॉस वोटिंग हुई उसने शिवसेना के कान खड़े कर दिए हैं। प्रदेश में महाविकास अघाड़ी की सरकार को यह बड़ा झटका माना जा रहा है। अभी उद्धव सरकार इस झटके से उबर भी नहीं पाई थी कि अब प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री एकनाथ शिंदे कई विधायकों के साथ लापता हो गए हैं। एक रिपोर्ट की मानें तो शिंदे के साथ तकरीबन 20 विधायक हैं और शिंदे आज दोपहर 2 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं। वहीं मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी 12 बजे गठबंधन की बैठक बुलाई है। वहीं कांग्रेस ने भी विधायकों की दिल्ली बुलाया है।

कौन हैं एकनाथ शिंदे
एकनाथ शिंदे उद्धव ठाकरे सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं, उनके पास शहरी विकास मंत्रालय है। वह कोपरी-पकपखड़ी विधानसभा सीट से पार्टी के विधायक भी हैं जोकि थाणे जिले के अंतर्गत आती है। महाराष्ट्र विधानसभा में चार बार चुनाव जीतकर एकनाथ शिंदे पहुंचे। वर्ष 2004, 2009, 2014 और 2019 में उन्होंने विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की है। एकनाथ शिंदे शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे से काफी प्रभावित थे। 2014 के विधानसभा चुनाव के बाद जब शिवसेना ने विपक्ष में बैठने का फैसला लिया था तो एकनाथ खड़से को विपक्ष का नेता बनाया गया था। इक महीने के बाद शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने का फैसला लिया।

क्या हुआ विधान परिषद के चुनाव में
शिवसेना के विधायकों की बात करें तो उसके पास कुल अनुमानित वोट 64 हैं, लेकिन पार्टी के पक्ष में सिर्फ 55 वोट पड़े। हाल ही में शिवसेना के एक विधायक की मौत हो गई थी। वहीं कुछ छोटे दल और निर्दलीय विधायक शिवसेना का समर्थन कर रहे थे। वहीं शिवसेना के सिर्फ 52 विधायकों ने ही पार्टी के पक्ष में वोट किया, ऐसे में 12 वोट कम होने की वजह से पार्टी को बड़ा झटका लगा और भाजपा के उम्मीदवार को चुनाव में जीत मिली थी।

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