सुषमा स्वराज मेरी "आइडियल", शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने बोली दिल की बात
Maharashtra News: एनसीपी (एसपी) मुखिया शरद पवार की बेटी और बारामती सांसद सुप्रिया सुलेन महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव से पहले कौन होगा सीएम का चेहरा इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इसके साथ ही सुप्रिया सुले ने ये भी खुलासा किया कि राजनीति में वो किसे अपना आइडियल मानती हैं।
आपको जानकर हैरानी होगी कि सुप्रिया सुले ने राजनीति में अपना गुरु राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले अपने पिता शरद पवार को नहीं बताया बल्कि उन उन्होंने भाजपा की दिग्गज नेता रहीं दिवंगत सुषमा स्वराज को बताया। आइए जानते हैं देश की पूर्व विदेश मंत्री और भाजपा की दिग्गज नेता स्वर्गीय सुषमा स्वाराज के बारे में क्या बोली सांसद सुप्रिया सुले?

दरअसल, एबीपी न्यूज को दिए इंटरव्यू में सांसद सुप्रिया सुले ने कई मुद्दों पर खुलकर बात की। जिसमें उन्होंने ये खुलाास किया कि वो सुषमा स्वराज उनकी गुरु हैं।
'सुषमा स्वराज मेरी गुरु'
महाराष्ट्र और देश के मौजूदा राजनीतिक माहौल पर चर्चा करते हुए सुप्रिया सुले ने बताया कि वो दिवंगत सुषमा स्वराज को अपना गुरु मानती हैं। इसके साथ ही सुले ने वर्तमान भाजपा में स्वराज जैसे नेताओं की कमी पर दुख जताया। इसके साथ ही उन्होंने कहा उस समय मतभेदों के बावजूद विचारों का आदान-प्रदान होता था। सुप्रिया सुले ने कहा स्वर्गीय सुषमा स्वराज को तो मैं गुरु समान मानती हूं लेकिन आज के समय मे ऐसे नेताओं की कमी है।
महाराष्ट्र में एमवीए सरकार बनने का किया दावा
महाराष्ट्र में 2024 के विधानसभा चुनावों में भाजपा के लिए सत्ता हासिल करना चुनौतीपूर्ण होगा। इसके साथ ही सुले ने महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी की सरकार बनने का दावा किया।
सीएम चेहरा पर क्या बोलीं सुप्रिया सुले?
महा विकास अघाड़ी की ओर से कौन होगा सीएम चेहरा इस पर सुप्रिया सुले ने कहा अगर महाराष्ट्र में एमवीए गठबंधन की सरकार बनती है तो उद्धव ठाकरे या कांग्रेस का कोई नेता सीएम बन सकता है। इसके साथ ही सुले ने कहा "हमारी पार्टी इस दौड़ से बाहर है। हमें किसी पद में कोई दिलचस्पी नहीं है।"
जाति जनगणना का सुप्रिया सुले ने किया समर्थन
जाति जनगणना के विषय पर सुले ने इस बात को दोहराया कि वे और उनकी पार्टी इसके लिए समर्थन करती हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर आरएसएस के इसी तरह के रुख का स्वागत किया। बुलडोजर की कार्रवाई के बारे में उन्होंने टिप्पणी की कि अदालतों ने मनमाने नियम लागू करने वालों को करारा झटका दिया है, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश संविधान से चलता है।












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