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अजित पवार की उधर हो चुकी थी मौत, लेकिन मानने को तैयार नहीं थी सुनेत्रा, होटल के कमरे में फिर जो हुआ...

Sunetra Pawar wife Ajit Pawar: दिल्ली की ठंडी सुबह थी। होटल के कमरे में बैठी सुनेत्रा पवार को अचानक एक फोन कॉल आया। उधर से आवाज कांप रही थी, कहा गया कि उनके पति, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। सुनेत्रा ने बिना रुके जवाब दिया। सुनेत्रा ने बिना एक पल गंवाए कहा, "ऐसी घटिया बातें मत कीजिए, वो ठीक हैं।" उन्होंने फोन काट दिया। उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि जो शख्स कुछ घंटे पहले उनसे हंसते हुए बात कर रहा था, वह यूं अचानक दुनिया छोड़ सकता है।

उन्हें भरोसा ही नहीं हुआ कि ऐसा कुछ हो सकता है। राजनीति में रहने वाले लोग अफवाहों के आदि हो जाते हैं। सुनेत्रा को लगा यह भी वैसी ही कोई गलत खबर होगी। लेकिन कुछ ही मिनटों बाद जो हुआ, उसने उनकी दुनिया ही बदल दी।

Sunetra Pawar wife Ajit Pawar

वीडियो कॉल जिसने सच को सामने रख दिया

कुछ देर बाद एक अनजान नंबर से वीडियो कॉल आई। स्क्रीन पर जो दिखा, वह किसी बुरे सपने से कम नहीं था। रनवे के पास जलता हुआ विमान, धुएं के काले गुबार और भागते लोग। कैमरा कांप रहा था। आवाज साफ नहीं थी, लेकिन तस्वीरें सब कुछ कह रही थीं।

सुनेत्रा कुछ सेकंड तक स्क्रीन को देखती रहीं। उनका दिमाग उस सच्चाई को स्वीकार करने से इनकार कर रहा था। वह बार-बार कहती रहीं - "ये उनका प्लेन नहीं हो सकता।" लेकिन भीतर कहीं कुछ टूट चुका था। मोबाइल उनके हाथ से फिसल गया और आंखों से आंसू बहने लगे। उसी पल उन्हें समझ आ गया कि यह कोई अफवाह नहीं थी। उस वक्त दिल्ली के होटल के कमरे में मातम छा गया, सुनेत्रा के पैरों तले जमीन खिसक गई, मानों उनके शरीर में जान ना हो। कई घंटों तक वो बेसुधर हीं।

Sunetra Pawar wife Ajit Pawar

कैसे हुआ अजित पवार का प्लेन क्रैश?

अजित पवार का प्लेन क्रैश 28 जनवरी की सुबह करीब पौने नौ बजे हुआ। अजित पवार का छोटा विमान मुंबई से उड़ान भरकर बारामती के पास लैंडिंग की तैयारी कर रहा था। तभी विमान असंतुलित हो गया और रनवे के पास जमीन से टकराते ही विस्फोट हो गया। विमान में अजित पवार के साथ उनके निजी सुरक्षा अधिकारी, पायलट, को पायलट और एक फ्लाइट अटेंडेंट मौजूद थे। हादसा इतना भीषण था कि किसी को बचने का मौका नहीं मिला।

स्थानीय लोगों ने बताया कि विमान हवा में अजीब तरीके से डगमगा रहा था। कुछ सेकंड बाद तेज आवाज हुई और आग का गोला बन गया। दूर तक धुआं दिखाई देने लगा। खबर फैलते ही पूरा इलाका सन्न रह गया। कुछ ही घंटों में यह खबर पूरे महाराष्ट्र में आग की तरह फैल गई।

अजति पवार महाराष्ट्र की राजनीति का बड़ा नाम माने जाते थे। सहकारिता से लेकर ग्रामीण विकास तक उनकी पकड़ मजबूत थी। उनके अचानक जाने की खबर से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक, हर बड़े नेता ने शोक संदेश जारी किया। किसी ने उन्हें जमीनी नेता बताया, तो किसी ने इसे व्यक्तिगत क्षति कहा। विधानसभा की कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित कर दी गई।

Sunetra Pawar wife Ajit Pawar

कौन हैं सुनेत्रा पवार? महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी CM तक का सफर

पिछले दो साल सुनेत्रा पवार के लिए किसी रोलरकोस्टर से कम नहीं रहे। 61 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली बार सक्रिय राजनीति में कदम रखा। लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं सकीं। आमतौर पर यहां राजनीतिक कहानियां खत्म हो जाती हैं, लेकिन सुनेत्रा के साथ ऐसा नहीं हुआ। हार के कुछ ही समय बाद उनका नाम सीधे राज्यसभा के लिए सामने आया। यह एंट्री कई लोगों के लिए चौंकाने वाली थी, क्योंकि सुनेत्रा हमेशा लो प्रोफाइल में रहने वाली शख्सियत मानी जाती थीं।

जब जिम्मेदारी ने निजी दायरे को तोड़ा

राजनीति में उनकी यह भूमिका अचानक और बड़ी तब हो गई, जब हालात बदले और उन्हें महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। यह पद उनके पति अजित पवार के अचानक निधन के बाद खाली हुआ था। अब सुनेत्रा को ऐसे राज्य में नेतृत्व संभालना है, जहां राजनीति पहले से ही बंटी हुई थी और पार्टी के भीतर खींचतान खुलकर सामने आ चुकी थी। निजी जीवन से निकलकर सार्वजनिक मंच पर आना उनके लिए आसान नहीं था।

भारत की राजनीति में यह कोई नई कहानी नहीं है। कई बार परिस्थितियां नेताओं की पत्नियों को राजनीति के केंद्र में ला खड़ा करती हैं। कभी मजबूरी में, कभी विरासत के तौर पर। सुनेत्रा पवार की कहानी भी उसी सिलसिले की एक कड़ी मानी जाती है। अगर अजित पवार को बारामती का 'दादा' कहा जाता था, तो सुनेत्रा को लोग प्यार से 'वाहिनी' कहकर बुलाते थे। यह पहचान अब एक नई राजनीतिक जिम्मेदारी में बदल चुकी थी।

राजनीतिक परिवार में जन्मीं सुनेत्रा पवार, पिता और भाई जाने-माने नेता

सुनेत्रा पवार का जन्म 1963 में तत्कालीन उस्मानाबाद, जिसे अब धाराशिव कहा जाता है, में हुआ। वह एक ऐसे मराठा परिवार से आती हैं, जहां राजनीति कोई अजनबी दुनिया नहीं थी। उनके पिता बाजीराव पाटिल और भाई पद्मसिंह पाटिल राज्य की राजनीति के बड़े नाम रहे। पद्मसिंह पाटिल न सिर्फ पूर्व मंत्री थे, बल्कि पार्टी के संस्थापक सदस्यों में भी शामिल रहे और शरद पवार के करीबी माने जाते थे।

सुनेत्रा ने औरंगाबाद के एसबी आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज से 1983 में कॉमर्स में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। 1985 में उनके भाई के जरिए उनकी मुलाकात अजित पवार से हुई और उसी साल दोनों की शादी हो गई। इतने मजबूत राजनीतिक बैकग्राउंड के बावजूद सुनेत्रा ने लंबे समय तक राजनीति से दूरी बनाए रखी।

बारामती में सामाजिक पहचान

राजनीति के बजाय उन्होंने बारामती में सामाजिक कामों पर ध्यान दिया। शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय मुद्दों से जुड़कर उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। शायद यही वजह रही कि जब उन्हें राजनीति में आगे लाया गया, तो लोगों ने उन्हें सिर्फ किसी नेता की पत्नी नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद चेहरे के रूप में देखा।

नई भूमिका, नई चुनौती

अब सुनेत्रा पवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है बिखरी हुई राजनीति को संभालना और अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाना। उनकी यह काल्पनिक यात्रा बताती है कि कभी कभी राजनीति में प्रवेश योजना से नहीं, हालात से होता है। और वही हालात किसी इंसान को इतिहास के पन्नों में दर्ज कर देते हैं।

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