महाराष्ट्र: मराठा आरक्षण की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों ने वाहनों में लगाई आग, पथराव में 45 पुलिसकर्मी घायल
महाराष्ट्र के जालना जिले में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया है। जिसके परिणामस्वरूप पुलिस कर्मियों सहित 50 से अधिक लोग घायल हो गए। शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान जमकर पत्थरबाजी हुई थी। जिसमें पुलिस से लेकर आम लोग तक घायल हुए थे।
शनिवार को एक बार से मराठा आंदोलन हिंसक हो गया है। प्रदर्शनकारियों ने कई वाहनों को आग लगा दी है। जानकारी के मुताबिक, आरक्षण की मांग कर रहे कार्यकर्ताओं के एक समूह को तितर-बितर करने के लिए पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने के बाद तनाव फैल गया।

लाठीचार्ज के जवाब में प्रदर्शनकारियों ने पथराव शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि, कार्यकर्ता मनोज जारांगे के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी मंगलवार से मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर जालना के अंतरवाली सारथी गांव में भूख हड़ताल कर रहे हैं।
शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प तब हुई जब पुलिस ने डॉक्टर की सलाह पर जारांगे को अस्पताल ले जाने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों द्वारा उन पर पथराव शुरू करने के बाद कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस ने कहा कि कुछ लोगों ने राज्य परिवहन की बसों और निजी वाहनों को भी निशाना बनाया।
भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसूगैस के गोलों का इस्तेमाल करना पड़ा। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि पुलिस ने हवा में कुछ राउंड फायरिंग की, लेकिन अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है। वहीं जालना जिले में मराठों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में सड़क पर टायर जलाने से लातूर जहीराबाद हाईवे पर यातायात बाधित हो गया था।
भीड़ द्वारा पथराव किए जाने पर कम से कम 45 पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिनमें से 17 महिला पुलिसकर्मी थीं। जिन लोगों को गंभीर चोटें आईं हैं। उनका जालना सिविल अस्पताल में इलाज चल रहा है। घायलों में दो पुलिस उपाधीक्षक और कई महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
पुलिस ने हिंसा में कथित संलिप्तता के आरोप में 300 से अधिक लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शांति की अपील की और यह भी घोषणा की कि हिंसा की उच्च स्तरीय जांच के लिए एक समिति गठित की जाएगी।












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