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'RSS के लोग संविधान नहीं मानते', अंग्रेजो से लेते थे पेंशन', सपा विधायक अबू आजमी के फिर बिगड़े बोल

समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अबू कासिम आजमी ने 2 अक्‍टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर दिए गए बयान से नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद अबू आजमी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर जमकर हमला बोलते हुए अजीब बयान दे डाला है।

सपा विधायक आजमी ने कार्यक्रम में दावा किया कि भारत देश की आजादी में आरएसस का कोई योगदान नहीं रहा है। उन्‍होंने आह्वान किया कि इस सच्‍चाई को आज की युवा पीढ़ी के बताना बहुत जरूरी है।

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न्यूज़ एजेंसी एएनआई से खास बातचीत में आजमी ने आगे कहा, "नए जमाने के बच्चों को यह बताना चाहिए कि हमारा देश कैसे आजाद हुआ और देश की आजादी में किन लोगों ने कुर्बानी दी। इससे सच्चाई उनके सामने आएगी और नफरत फैलाने वाले लोगों का पर्दाफाश होगा।"

RSS संविधान नहीं मानता, वर्षो तक झंडा नहीं फहराया

आरएसएस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "आरएसएस के लोग संविधान को नहीं मानते हैं। इन्होंने कई सालों तक तिरंगा नहीं फहराया। ये लोग पूरे देश को एक ही रंग में रंगना चाहते हैं। आज हर बच्चे को संविधान पढ़ने की जरूरत है, ताकि देश में अमन और शांति कायम हो सके।"

RSS के लोगों को अंग्रेजों से पेंशन मिलती थी

आजमी ने यह भी दावा किया कि आरएसएस के लोगों को अंग्रेजों से पेंशन मिलती थी। उन्होंने कहा, "हमने इतिहास में पढ़ा है कि जब आरएसएस के लोग जेल में बंद थे, तो वे अंग्रेजों को चिट्ठी लिखकर यह कहते थे कि उन्हें छोड़ दिया जाए, ताकि वे गांधीजी के स्वदेशी आंदोलन को खत्म कर सकें।" उन्होंने सवाल उठाया, "इन लोगों का भारत की आजादी में क्या योगदान है? यह सच आज के लोगों को बताना बहुत जरूरी है।"

बीजेपी जो भी काम करेगी, वह...

अबू आजमी ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा, "बीजेपी जो भी काम करेगी, वह मुसलमानों के खिलाफ ही होगा। उन्होंने एक भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया और न ही किसी मुस्लिम को मंत्री बनाया। मुसलमानों के खिलाफ जहर घोला जा रहा है।"

दुनिया तरक्‍की कर रही हम हिंदू-मुसलमान...

अबू आजमी ने आधुनिक शिक्षा की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, "आज दुनिया तरक्की कर रही है, लेकिन हम आज भी हिंदू-मुस्लिम के मुद्दों में उलझे हुए हैं, जिससे नफरत बढ़ रही है। मेरा मानना है कि आज एआई का जमाना है और बच्चों को आधुनिक शिक्षा मिलनी चाहिए।"

अबू आजमी के पूर्व में दिए विवादित बयान

अबू आज़मी अक्सर अपने बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं। उनके बयानों ने हमेशा सार्वजनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचाई है।

औरंगजेब ने कई मंदिर बनवाए

मार्च 2025 में, आज़मी ने मुगल शासक औरंगज़ेब को "क्रूर शासक" मानने से इनकार कर दिया था और दावा किया था कि उसने "कई मंदिर बनवाए थे।" इस बयान ने महाराष्ट्र में भारी विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया।

इस विवाद के चलते विधान सभा ने उन्हें बजट सत्र के दौरान निलंबित कर दिया था। बाद में, आज़मी ने स्पष्ट किया कि उनके शब्दों को "गलत समझा गया" था और अगर किसी को ठेस पहुँची है, तो वह अपने बयान वापस लेते हैं।

"वंदे मातरम" गा नहीं सकते क्‍योंकि...

जुलाई 2023 में, उन्होंने "वंदे मातरम" पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे इसका सम्मान करते हैं, लेकिन इसे गा नहीं सकते, क्योंकि उनका धर्म (इस्लाम) उन्हें "किसी को प्रणाम करने" की अनुमति नहीं देता। भाजपा ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी।

महिला सिर्फ अपने पति से के साथ ही...

महिलाओं से संबंधित उनके बयानों ने भी विवाद खड़ा किया है। आज़मी ने एक बार कहा था कि यदि कोई पुरुष और महिला विवाह के बाहर संबंध बनाते हैं, तो उन्हें दंडित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनके धर्म के अनुसार, एक महिला को केवल उसके पति के साथ ही संबंध रखने की अनुमति होती है। इन बयानों को रूढ़िवादी और पितृसत्तात्मक करार दिया गया था।

बलात्कार पीड़ितों को भी फाँसी...

2014 में, आज़मी के एक साक्षात्कार में यह दावा किया गया था कि उन्होंने "बलात्कार पीड़ितों को भी फाँसी दी जानी चाहिए" जैसा बयान दिया था। हालाँकि, बाद में आज़मी ने इस बात से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें "गलत उद्धृत" किया गया था और उन्होंने कभी ऐसा नहीं कहा कि पीड़ितों को दंडित किया जाना चाहिए।

ये बात अबू आजमी ने अगस्त 2025 में, उन्होंने 2022 के उदयपुर हत्याकांड (नूपुर शर्मा विवाद से संबंधित) को "हर कार्रवाई की प्रतिक्रिया" बताया, जिसे कई लोगों ने विवादास्पद और अनुचित करार दिया था।

"मराठी और हिंदी में क्या अंतर है?

अक्टूबर 2025 में, आज़मी ने मराठी और हिंदी भाषाओं पर एक टिप्पणी करते हुए कहा था कि "मराठी और हिंदी में क्या अंतर है? मराठी की आवश्यकता क्या है?" इस बयान ने मराठी भाषी समुदाय में भारी विरोध और आक्रोश पैदा किया था।

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