परमबीर सिंह से जुड़े वसूली केस में पुलिस इंस्पेक्टर नंदकुमार गोपाल, आशा कोरके की जमानत खारिज
मुंबई, 22 नवंबर: एक्सटोर्शन (जबरन वसूली) के एक मामल में मुंबई की एस्प्लेनेड कोर्ट ने दो पुलिस अधिकारियों नंदकुमार गोपाल और आशा कोरके की जमानत याचिका खारिज कर दी है। जबरन वसूली का ये केस मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह से जुड़ा है। नंदकुमार गोपाले आणि आशा कोरके दो हफ्ते से जेल में हैं। सोमवार को उन्होंने अदालत में बेल की अर्जी दी थी, जिसे कोर्ट ने नामंजूर कर दिया।

महाराष्ट्र सीआईडी ने इस महीने के शुरू में पुलिस इंस्पेक्टर नंदकुमार गोपाल और इंस्पेक्टर आशा कोर्के को गिरफ्तार किया था। दोनों की गिरफ्तारी श्याम सुंदर अग्रवाल की शिकायत पर हुई है, जिसने 15 करोड़ रुपए की जबरन वसूली का आरोप लगाया था। रियल एस्टेट डेवेलपर श्यामसुन्दर अग्रवाल ने जुलाई, 2021 को मरीन ड्राइव थाने में परमबीर सिंह और सात अन्य के खिलाफ रक्सटोर्शन का मामला दर्ज कराया था। एफआईआर में जो नाम हैं। उसमें पांच पुलिस अधिकारी हैं। जिसमें दो आरोपी पुलिस अधिकारियों निरीक्षक नंदकुमार गोपाले और आशा कोर्के की गिरफ्तारी होने के बाद दोनों जेल में हैं।
परमबीर सिंह को फरार घोषित किया गया
जबरन वसूली के मामले में परमबीर सिंह को अदालत फरार घोषित कर चुकी हैं। एस्प्लेनेड कोर्ट के अलावा मुंबई के गोरेगांव और पड़ोसी ठाणे जिले में भी रंगदारी के दो अन्य मामलों में परमबीर सिंह के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किए गए थे। जिसके बाद उनको फरार घोषित किया जा चुका है। बता दें कि परमबीर सिंह का कई महीने से कोई अता-पता नहीं है। कई बार अलग-अलग अदालतें और पुलिस उनको समन कर चुकी हैं लेकिन वो ना अपने घर पर हैं और ना किसी दूसरे ठिकाने पर वो मिले हैं।
बता दें कि परमबीर सिंह इस साल के शुरुआत में महाराष्ट्र के तत्कालीन गृहमंत्री अनिल देशमुख पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि बाद में वो खुद ही वसूली के मामलों में आरोपित हो गए। इतना ही नहीं उन्होंने देशमुख के खिलाफ कोई सबूत होने से भी जांच आयोग को दिए हलफनामे में इनकार कर दिया।












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