Maharashtra Elections: नवाब मलिक की अंतरिम जमानत का क्या होगा? HC में दर्ज हुई बेल रद्द करने की याचिका
Maharashtra Chunav 2024: बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर एनसीपी नेता नवाब मलिक को दी गई अंतरिम जमानत रद्द करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता सैमसन पठारे का दावा है कि मलिक गवाहों को धमकाकर और शर्तों का उल्लंघन करके अपनी जमानत का दुरुपयोग कर रहे हैं। मलिक को प्रवर्तन निदेशालय ने दाऊद इब्राहिम से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फरवरी 2022 में गिरफ्तार किया था।
नवाब मलिक के खिलाफ आरोप
पठारे का आरोप है कि मलिक ने अपनी अंतरिम जमानत की अदालत द्वारा लगाई गई शर्तों का उल्लंघन किया है। उनका दावा है कि मलिक ने कथित किडनी फेलियर के कारण मेडिकल जमानत हासिल की है, जिसके लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती होने और लगातार इलाज की आवश्यकता थी। पठारे का तर्क है कि मलिक की कोई सर्जरी या अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं है, जिससे उनकी मेडिकल स्थिति की वैधता पर सवाल उठता है।

सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2023 में किडनी के इलाज के लिए मलिक को अंतरिम मेडिकल बेल दी थी। नियमित जमानत के लिए उनकी याचिका अभी भी हाई कोर्ट में लंबित है। मेडिकल बेल पर होने के बावजूद मलिक महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मानखुर्द शिवाजी नगर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं।
पठारे की याचिका में मलिक पर अपने चुनाव अभियान का इस्तेमाल अपने मामले में शामिल गवाहों को डराने के लिए करने का भी आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ता का दावा है कि मलिक गवाहों के साथ "बदला ले रहे हैं" और उन पर विशेष पीएमएलए अदालत के समक्ष अपनी गवाही बदलने का दबाव बना रहे हैं।
याचिका में यह भी कहा गया है कि मलिक की चुनावी गतिविधियां उन्हें पीएमएलए अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखती हैं। इसमें आरोप लगाया गया है कि वह मीडिया को साक्षात्कार दे रहे हैं, जो उनकी जमानत शर्तों का उल्लंघन है। पठारे ने जोर देकर कहा कि ये कार्य उन्हें दी गई स्वतंत्रता का दुरुपयोग दर्शाते हैं।
कानूनी कार्यवाही और जमानत की शर्तें
सर्वोच्च न्यायालय ने मलिक को अगस्त 2023 में अंतरिम जमानत दी थी, जिसे समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह चिकित्सा जमानत तब तक वैध रहेगी जब तक उच्च न्यायालय उनकी नियमित जमानत याचिका पर फैसला नहीं ले लेता।
पठारे की अर्जी में यह भी कहा गया है कि मलिक अपनी जमानत शर्तों के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय को नियमित चिकित्सा अपडेट देने में विफल रहे हैं। इस चूक को अदालत द्वारा निर्धारित शर्तों का एक और उल्लंघन माना जा रहा है।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि मलिक की हरकतें जानबूझकर विशेष अदालत के समक्ष कार्यवाही में देरी कर रही हैं। पठारे का मानना है कि इन तरीकों से न्याय से बचकर मलिक अंतरिम जमानत के तहत दी गई छूट का दुरुपयोग कर रहे हैं।
उच्च न्यायालय अब इन आरोपों और याचिका में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर नवाब मलिक की अंतरिम जमानत रद्द करने के पठारे के अनुरोध पर विचार करेगा।












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