परभणी विधानसभा सीट पर शिवसेना में घमासान, शिंदे गुट के आनंद भरोसे की दावेदारी से मुकाबला हुआ दिलचस्प
Parbhani Assembly Seat Anand Bharose: महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव 20 नवंबर को होने वाले हैं, और इस बार राज्य में राजनीतिक रस्साकशी और मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। खासकर परभणी विधानसभा सीट, जहां पर शिवसेना के अंदर भारी बदलाव और विभाजन के बाद शिंदे गुट के नेता आनंद भरोसे की दावेदारी ने चुनावी मैदान को गरमा दिया है। इस सीट पर मुकाबला अत्यधिक कड़ा होने की संभावना है, और परिणाम 23 नवंबर को घोषित होंगे।
शिवसेना का गढ़ है परभणी विधानसभा क्षेत्र
परभणी विधानसभा सीट पर पिछले 35 साल से शिवसेना का कब्जा है। शिव सेना के डाॅ. राहुल पाटिल विधायक हैं। शिवसेना के विभाजन के बाद इस तालुके में भी शिवसेना विभाजित हो गई। इस समय इस संसदीय क्षेत्र में दोनों पार्टियों के बीच लड़ाई है और शिंदे गुट ने आनंद भरोसे को पाटिल के सामने मैदान में उतारा है। अब शिवसेना के आंतरिक विभाजन के कारण राजनीति के एक बड़े युद्ध का मैदान बन चुकी है। इस बार परभणी से चुनाव लड़ रहे हैं शिंदे गुट के नेता आनंद भरोसे, जो वर्तमान में शिवसेना के डॉ. राहुल पाटिल को चुनौती दे रहे हैं।

आनंद भरोसे पर शिंदे ने जताया भरोसा
शिवसेना के भीतर गहरी दरार के बाद, पार्टी के कई कार्यकर्ता शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं। खासतौर पर, 21 अगस्त को, परभणी के करेगांव के सुपंच अप्पाराव वावरे ने सैकड़ों समर्थकों के साथ शिंदे गुट का दामन थामा, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि पार्टी में वफ़ादारी को लेकर बड़ा बदलाव हो रहा है।
परभणी विधानसभा क्षेत्र में शिवसेना का पहले से मजबूत प्रभाव रहा है, जहां एमपी और एमएलए दोनों पद शिवसेना के पास थे। लेकिन पार्टी में हुए हालिया विभाजन के बाद, एक पक्ष ने उद्धव ठाकरे का समर्थन किया, तो दूसरा पक्ष मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ जुड़ गया।
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शिंदे गुट ने इसे अपनी शक्ति बढ़ाने का अवसर माना है। आनंद भरोसे, जिन्होंने 2014 में भाजपा से चुनाव लड़ा था, अब शिंदे गुट से अपनी चुनावी दावेदारी पेश कर रहे हैं। शिंदे गुट ठाकरे गुट के भीतर असंतोष का लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं, और भरोसे की लोकप्रियता इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
आनंद भरोसे की राजनीतिक यात्रा
आनंद भरोसे की राजनीतिक यात्रा 2001 से शुरू हुई थी और वे कृषि, समुदाय सेवा और स्थानीय प्रशासन में अपनी सक्रिय भागीदारी के लिए जाने जाते हैं। परभणी कृषि उपज मंडी समिति के उपाध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल ने उन्हें जनता के बीच एक विश्वसनीय नेता के रूप में स्थापित किया। महामारी के दौरान उन्होंने किसानों के हित में किए गए कार्यों के कारण भी अपनी पहचान बनाई।
राहुल पाटिल पर बढ़ता विरोध
वहीं, डॉ. राहुल पाटिल, जो इस बार तीसरी बार चुनावी मैदान में हैं, परभणी में अपने नेतृत्व को लेकर बढ़ते विरोध का सामना कर रहे हैं। पिछले एक साल में ठाकरे गुट के कई पूर्व सरपंचों का शिंदे गुट में शामिल होना, पाटिल के नेतृत्व में असंतोष को दर्शाता है। चुनावी माहौल में यह बदलाव अहम साबित हो सकता है और संभावित रूप से इस बार भरोसे के पक्ष में एक बड़ा निर्णायक पल बन सकता है।
भौगोलिक स्थिति और चुनावी समीकरण
परभणी विधानसभा क्षेत्र का भौगोलिक क्षेत्र भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह सीट महाराष्ट्र विधानसभा के 288 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है और परभणी जिले के चार प्रमुख क्षेत्र - परभणी, पिंगली, ज़री और परभणी नगरपालिका क्षेत्र के तहत आती है। इसके अलावा, यह लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का भी हिस्सा है।
दिलचस्प हुआ मुकाबला
परभणी विधानसभा चुनाव, शिवसेना के भीतर चल रहे संघर्ष और पार्टी के विभाजन के कारण इस बार खासा रोमांचक हो गया है। शिंदे गुट के नेता आनंद भरोसे की दावेदारी ने चुनावी परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया है। यह चुनाव परभणी के राजनीतिक भविष्य के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकता है। 23 नवंबर को जब नतीजे आएंगे, तब यह साफ होगा कि शिवसेना के इस गढ़ में कौन सी सत्ता स्थापित होगी।
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