Onions Price: क्या फिर रुलाएगा प्याज? महाराष्ट्र में आज से व्यापारी हड़ताल पर, जानिए क्यों?
Onions Price expensive? एक बार फिर से आम आदमी को प्याज रूला सकता है क्योंकि आज से महाराष्ट्र में प्याज व्यापारियों और मंडी कर्मचारियों ने अनिश्चित कालीन हड़ताल शुरू कर दी है, जिसकी वजह से इसकी सप्लाई पर असर होगा और इसका इफेक्ट पूरे भारत में देखने को मिल सकता है, जिससे प्याज के मंहगे होने के आसार नजर आ रहे हैं। इस वक्त महाराष्ट्र में प्याज का रेट 15 रुपए प्रतिकिग्रा से बढ़कर 40 रुपए प्रतिकिग्रा तक पहुंच गया है।

इस बार प्याज की डिमांड और उपज दोनों बहुत अच्छे हुए थे , ऐसे में किसानों को तगड़ा मुनाफा होने के आसार थे लेकिन नेफेस यानी National Federation Cooperative Marketing Federation of India और National Cooperative consumers fedration of india यानी कि एनसीसीएफ नासिक के किसानों से प्याज खरीद रहे हैं और दोनो एपीएमसी को व्यापारियों द्वारा थोक खरीदारों से कम कीमत पर बेच रहे हैं।
व्यापारियों को हो रहा है नुकसान इसलिए किया हड़ताल का ऐलान
इनमें प्राइस का अंतर 500-700 तक है, जिसके कारण व्यापारियों को नुकसान हो रहा है। इसी वजह से नासिक के 500 से ज्यादा व्यापारियों ने आज से हड़ताल का ऐलान कर दिया है और उन्होंनें नासिक मंडी में होने वाली प्याज की नीलामी में भाग लेने से मना कर दिया है।
बफर स्टॉक को खुदरा कीमतों पर बेचे
व्यारपारियों का कहना है कि नेफेस और एनसीसीएफ दोनों अपने बफर स्टॉक को खुदरा कीमतों पर बेचे और हमारी केंद्र सरकार से मांग है कि उसने निर्यात शुल्क चालीस प्रतिशत प्याज पर जो लगाया है उसे भी वापस ले, जब तक वो ऐसा नहीं करते हैं तब तक हमारी हड़ताल जारी रहेगी।
दूसरे राज्यों में प्याज की आपूर्ति प्रभावित होगी
आपको बता दें कि देश की बड़ी मंडियों में से एक नासिक में अगर इसी तरह से हड़ताल रही है तो देश के दूसरे राज्यों में प्याज की आपूर्ति प्रभावित होगी और इससे निश्चित तौर पर प्याज के रेट बढ़ेगा। आपको बता दें कि नया निर्यात शुल्क 31 दिसंबर तक प्रभावी रहेगा।
खुदरा दामों में पचास फीसदी की वृद्धि
गौरतलब है कि बीते सप्ताह प्याज के खुदरा दामों में पचास फीसदी की वृद्धि देखी गई। हालांकि चुनावी साल में विपक्ष प्याज को मुद्दा ना बनाए इसलिए सरकार की ओर से इसकी कीमत को कंट्रोल करने का लगातार प्रयास जारी है और इसी वजह से उसने कुछ सख्त कदम भी उठाए हैं लेकिन व्यापारियों की हड़ताल उसके लिए मुसीबत बन सकती है। महाराष्ट्र में लगभग 12-13 खरीद केंद्र खोले गए हैं, जहां सहकारी समिति ने महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में किसानों से सीधे खरीद शुरू की लेकिन व्यापारियों के हड़ताली कदम से ये दांव उसके लिए उल्टा साबित हो सकता है।












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