महाराष्ट्र हेल्थ डिपार्टमेंट ने दी चेतावनी, राज्य में जनवरी में आ सकती है ओमिक्रॉन लहर
मुंबई, 16 दिसंबर: देश में ओमिक्रॉन के मामलों में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को चेतावनियां जारी कर रहा है। महाराष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को कहा कि महाराष्ट्र में अगले साल जनवरी में ओमिक्रॉन वैरिएंट के और मामले सामने आने की संभावना है। बीते 24 घंटे में देश में ओमिक्रॉन के 12 नए केस सामने आए हैं। देश में अब तक ओमिक्रॉन के 73 मामले सामने आ चुके हैं। सबसे ज्यादा 32 केस महाराष्ट्र में हैं। महाराष्ट्र में जनवरी में ओमिक्रॉन की लहर आने की आशंका जताई गई है।
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महाराष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ प्रदीप व्यास ने मुंबई में महाराष्ट्र सरकार की कैबिनेट बैठक में कहा कि, कोरोनो वायरस का ओमिक्रॉन संस्करण दुनिया में तेजी से फैल रहा है और महाराष्ट्र में अगले साल जनवरी में ओमिक्रॉन से संक्रमित मामलों में वृद्धि देखने की संभावना है। ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरों में भी मिलेंगे।
इस बीच, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सभी पात्र लोगों को एंटी-कोविड-19 टीके की दूसरी खुराक जल्द से जल्द लगवाने के लिए अतिरिक्त प्रयास करें। वहीं दूसरी ओर ओमिक्रॉन के लगातार मामले सामने के बाद मुंबई में आज से 31 दिसंबर तक धारा 144 लगा दी गई है। इसी तरह राजधानी दिल्ली में भी कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं। दिल्ली में भी आज 4 ओमिक्रॉन के मामले सामने आए हैं।
कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के खतरे के बीच बूस्टर डोज पर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी ने अमेरिकी कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन को बूस्टर डोज के लिए सही माना है। बुधवार को एजेंसी ने कहा कि इसे पहली खुराक लेने के 2 महीने बाद बूस्टर डोज की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन को लेकर एक बार फिर चेतावनी जारी की है। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि ओमिक्रॉन संभवत: ज्यादातर देशों में पहुंच चुका है और अभूतपूर्व तेजी से फैल रहा है। भारत में भी ओमिक्रॉन के लगातार मामले सामने आ रहे हैं। अफ्रीकी देशों में ही नहीं ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले अमेरिका, यूरोप में भी तेजी से बढ़ रहे हैं। भारत में ओमिक्रॉन के 57 मामले हो चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि वास्तविकता यही है कि ओमिक्रॉन संभवतः ज्यादातर देशों में पहुंच चुका है।












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